नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की आपत्ति के बाद NCERT की क्लास 8 की नई सोशल साइंस किताब में शामिल ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ वाले चैप्टर पर बिक्री रोक लगा दी गई है। किताब को NCERT की वेबसाइट से हटा लिया गया है और ऑफलाइन बिक्री भी बंद कर दी गई है। CJI ने इसे न्यायपालिका को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश बताया और कहा कि वे खुद इस मामले को देखेंगे।
किताब में क्या था विवादित हिस्सा
NCERT ने 23 फरवरी 2026 को क्लास 8 के लिए सोशल साइंस की नई किताब ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ जारी की थी। इस किताब के चैप्टर ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ में ‘करप्शन इन द ज्यूडिशियरी’ टॉपिक जोड़ा गया था। इसमें लिखा था कि न्यायपालिका के सामने प्रमुख चुनौतियां हैं – भ्रष्टाचार, लाखों-करोड़ों पेंडिंग केस और जजों की कमी। किताब में सुप्रीम कोर्ट में 81 हजार, हाईकोर्ट्स में 62 लाख 40 हजार और डिस्ट्रिक्ट-सबॉर्डिनेट कोर्ट्स में 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केसों का जिक्र था।
एक सेक्शन का शीर्षक था – ‘Justice delayed is justice denied’ (इंसाफ में देरी इंसाफ न मिलने जैसी है)। किताब में जजों के आचार संहिता, अंदरूनी अकाउंटेबिलिटी, CPGRAMS से शिकायतों की संख्या (2017-2021 में 1,600 से ज्यादा) और इंपीचमेंट प्रक्रिया का भी जिक्र था। पूर्व CJI बीआर गवई के बयान का हवाला दिया गया था कि ज्यूडिशियरी में करप्शन पब्लिक ट्रस्ट को नुकसान पहुंचाता है और ट्रांसपेरेंसी से इसे ठीक किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में मामला कैसे पहुंचा
बुधवार को सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी ने CJI सूर्यकांत, जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने यह मुद्दा उठाया। सिब्बल ने कहा कि क्लास 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पढ़ाना निंदनीय है। सिंघवी ने तंज कसा कि NCERT ने मान लिया है कि राजनीति और ब्यूरोक्रेसी में भ्रष्टाचार नहीं है, सिर्फ ज्यूडिशियरी में है।
CJI सूर्यकांत ने तीखी टिप्पणी की
“दुनिया में किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। यह एक सोची-समझी और गहरी साजिश लगती है। मुझे पता है इससे कैसे निपटना है। मैं यह केस खुद हैंडल करूंगा।”
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने की कोई गुंजाइश नहीं बर्दाश्त की जाएगी।
NCERT की कार्रवाई और इंटरनल मीटिंग
CJI की टिप्पणी के बाद NCERT ने तुरंत किताब को वेबसाइट से हटा दिया। सूत्रों ने ANI को बताया कि किताब की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। PTI के अनुसार, विवादित चैप्टर को हटाया जा सकता है। NCERT ने चैप्टर सुझाने वाले एक्सपर्ट्स और मंजूरी देने वाले अधिकारियों की इंटरनल मीटिंग बुलाई है ताकि मामले की जांच हो सके। NCERT चेयरमैन दिनेश प्रसाद सकलानी या कोई आधिकारिक प्रवक्ता अभी तक इस पर कोई बयान नहीं दे पाया है। एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि मामला अब कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती।
सरकारी सूत्रों की प्रतिक्रिया
सरकारी सूत्रों ने कहा कि NCERT भले ही स्वायत्त संस्था है, लेकिन ऐसे संवेदनशील चैप्टर जोड़ने से पहले शासन के तीनों अंगों – कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका – को शामिल करना चाहिए था। अगर भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाना था तो सभी संस्थाओं पर संतुलित तरीके से बात होनी चाहिए थी। सूत्रों ने बताया कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े आंकड़े संसदीय रिकॉर्ड और नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड में उपलब्ध हैं, लेकिन फैक्ट्स की क्रॉस-वेरिफिकेशन के लिए केंद्र से परामर्श नहीं लिया गया।
किताब का संदर्भ और NEP-2020
यह किताब NEP-2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) के तहत तैयार की गई थी। कोरोना के बाद पुरानी किताबों में बदलाव कर नए टॉपिक्स जोड़े जा रहे हैं। पहली से आठवीं क्लास की नई किताबें 2025 में पब्लिश हो चुकी हैं। यह पार्ट-2 जुलाई 2025 में जारी हुआ था और 2026-27 सेशन से पढ़ाई जानी थी।
INPUT-ANANYA MISHRA















































