बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और पढ़ाई पर मोबाइल/सोशल मीडिया के बढ़ते नकारात्मक प्रभाव को रोकने के लिए कर्नाटक सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 6 मार्च 2026 को राज्य विधानसभा में बजट पेश करते हुए घोषणा की कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का उपयोग प्रतिबंधित किया जाएगा। यह फैसला ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के मॉडल से प्रेरित है, जहां हाल ही में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन लागू हुआ था। सरकार का कहना है कि यह कदम बच्चों में सोशल मीडिया एडिक्शन, मानसिक तनाव, अकादमिक गिरावट और हानिकारक कंटेंट के संपर्क को कम करने के लिए है।
घोषणा का विवरण और पृष्ठभूमि
बजट भाषण में CM सिद्धारमैया ने कहा कि मोबाइल फोन और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग बच्चों की सीखने की क्षमता, याददाश्त और कल्पनाशक्ति पर बुरा असर डाल रहा है। उन्होंने पहले फरवरी में विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलरों से राय ली थी और स्कूल शिक्षा मंत्री माधु बंगारप्पा ने कहा था कि अंतिम फैसला बच्चों, अभिभावकों और विशेषज्ञों से परामर्श के बाद लिया जाएगा। अब बजट में इसकी आधिकारिक घोषणा हो गई है। सरकार ने पहले ही ‘मोबाइल बीड़ी, पुस्तक हिडी’ (फोन छोड़ो, किताब पकड़ो) अभियान चलाया था, जिसमें लाखों छात्रों और शिक्षकों को शामिल किया गया था। यह बैन मुख्य रूप से सोशल मीडिया ऐप्स (जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक, टिकटॉक आदि) पर लागू होगा, लेकिन मोबाइल फोन के शैक्षणिक उपयोग पर अलग नियम हो सकते हैं।
कारण और प्रभाव
- बढ़ती एडिक्शन : अध्ययनों के अनुसार, 3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया उपयोग से चिंता, डिप्रेशन और पढ़ाई में कमी आती है।
- हानिकारक कंटेंट : बच्चों को अश्लील, हिंसक या गलत जानकारी मिलने का खतरा।
- अकादमिक गिरावट : कई रिपोर्ट्स में स्कूलों में फोन के कारण ध्यान भटकने की शिकायतें।
सरकार का मानना है कि यह सराहनीय प्रयास बच्चों को बचपन और पढ़ाई पर फोकस करने में मदद करेगा। हालांकि, विशेषज्ञों में मतभेद है, कुछ कहते हैं कि बैन व्यावहारिक नहीं होगा और इसे लागू करना मुश्किल है, जबकि अन्य इसे जरूरी मानते हैं।
कार्यान्वयन और चुनौतियां
अभी बैन के सटीक नियम (जैसे कैसे लागू होगा, जुर्माना, प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी आदि) स्पष्ट नहीं हैं। सरकार विशेषज्ञों से परामर्श कर रही है। भारत में यह पहला ऐसा राज्य स्तर का कदम होगा, जो अन्य राज्यों (जैसे आंध्र प्रदेश) में भी चर्चा का विषय बन सकता है। सोशल मीडिया कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा कि वे उम्र सत्यापन सख्त करें। अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की गई है कि वे बच्चों को किताबें पढ़ने और खेलकूद की ओर प्रोत्साहित करें।




















































