UP: उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब CHC (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) और PHC (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) पर तैनात डॉक्टरों का वेतन बायोमेट्रिक हाजिरी के आधार पर ही दिया जाएगा। महानिदेशक स्वास्थ्य ने पूरे प्रदेश में सभी CHC और PHC पर बायोमेट्रिक मशीनें अनिवार्य करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि हाजिरी के बिना वेतन जारी नहीं किया जाएगा। यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं में अनुपस्थिति और लापरवाही पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया है।
महानिदेशक स्वास्थ्य के नए निर्देश
महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. संजय कुमार ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को पत्र जारी कर सख्त निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि CHC और PHC पर तैनात डॉक्टरों, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट और अन्य चिकित्सा कर्मियों की दैनिक उपस्थिति बायोमेट्रिक मशीन से दर्ज की जाएगी। बायोमेट्रिक हाजिरी के बिना किसी भी कर्मचारी का वेतन बिल पास नहीं किया जाएगा। निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बायोमेट्रिक उपस्थिति का डेटा हर महीने की 5 तारीख तक मुख्यालय को अपलोड करना अनिवार्य होगा।
किन केंद्रों पर लागू होगा नियम?
यह नियम मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के CHC और PHC पर लागू होगा, जहां डॉक्टरों की अनुपस्थिति की शिकायतें सबसे ज्यादा आती रही हैं। शहरों के बड़े अस्पतालों (मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल) में फिलहाल यह व्यवस्था लागू नहीं की गई है, लेकिन भविष्य में इसे विस्तार देने की योजना है। महानिदेशक ने कहा है कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति जरूरी है।
क्यों लिया गया यह फैसला
विभागीय सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में CHC और PHC पर डॉक्टरों की अनुपस्थिति की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। कई जगहों पर डॉक्टर महीने में 8-10 दिन ही आते थे, लेकिन पूरा वेतन लेते थे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही थीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य विभाग को ऐसे मामलों पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में बायोमेट्रिक हाजिरी को अनिवार्य बनाने का निर्णय लिया गया है।
तकनीकी व्यवस्था और समयसीमा
सभी CHC और PHC पर पहले से ही बायोमेट्रिक मशीनें लगाई जा चुकी हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल पूरी तरह नहीं हो रहा था। अब महानिदेशक ने निर्देश दिया है कि अगले 15 दिनों के अंदर सभी मशीनों को सक्रिय किया जाए और हाजिरी का डेटा ऑनलाइन अपलोड होना शुरू हो जाए। यदि कोई मशीन खराब है तो तुरंत ठीक कराई जाए। विभाग ने कहा है कि वेतन बिल पास करने से पहले बायोमेट्रिक डेटा की जांच अनिवार्य होगी।
प्रतिक्रियाएं और प्रभाव
डॉक्टरों के संगठनों ने इस फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कुछ डॉक्टरों का कहना है कि यह नियम अच्छा है और अनुशासन लाएगा, जबकि कुछ ने कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और बिजली की समस्या के कारण बायोमेट्रिक हाजिरी में दिक्कत आ सकती है। विभाग ने कहा है कि ऐसी समस्याओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था (ऑफलाइन रिकॉर्डिंग और बाद में अपलोड) की जाएगी।
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