UP: उत्तर प्रदेश के निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) ने राजनीतिक मैदान में कदम रखने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। शाहजहांपुर में बृहस्पतिवार को आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि वे एक वैकल्पिक राजनीतिक विकल्प की तैयारी कर रहे हैं और जल्द ही इसकी सूचना सार्वजनिक करेंगे। साथ ही उन्होंने भाजपा और जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला बोला, यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ उनकी चुप्पी पर सवाल उठाए। यह बयान उनकी बढ़ती राजनीतिक सक्रियता का संकेत है, जो यूपी की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है।
प्रेस वार्ता में राजनीतिक एंट्री का ऐलान
शाहजहांपुर में परशुराम धाम दर्शन के बाद एक कैफे में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अलंकार अग्निहोत्री ने कहा, “एक विकल्प की तैयारी की जा रही है। जल्द ही इसकी सूचना दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूजीसी के नए नियमों (Promotion of Equity in Higher Education Regulations 2026) और अन्य मुद्दों पर जनप्रतिनिधि खामोश हैं, जिससे समाज में असंतोष बढ़ रहा है। अलंकार ने दावा किया कि अब ब्राह्मण और सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत है, क्योंकि मौजूदा सिस्टम में उनकी आवाज दब रही है।
भाजपा पर करारा हमला
अलंकार अग्निहोत्री ने भाजपा पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि कई जनप्रतिनिधि केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव जीतते हैं, लेकिन उनकी खुद की कोई जमीन नहीं बची है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी नियमों के खिलाफ देशभर में विरोध की आग भड़की हुई है, लेकिन सत्ता पक्ष के नेता चुप्पी साधे बैठे हैं। अलंकार ने इसे समाज को बांटने वाली नीतियों का हिस्सा बताया और कहा कि ऐसे समय में किसी को आगे आना ही पड़ेगा। उनकी यह टिप्पणी यूपी में ब्राह्मण समाज के असंतोष को और भड़काने वाली मानी जा रही है।
यूजीसी नियम और शंकराचार्य विवाद से शुरू हुई बगावत
अलंकार अग्निहोत्री 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं, जो बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट थे। उन्होंने 26 जनवरी 2026 को यूजीसी के नए नियमों को “काला कानून” बताते हुए और माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ कथित अभद्रता के विरोध में इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे के कुछ घंटों बाद ही यूपी सरकार ने उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया और विभागीय जांच शुरू की। तब से वे विभिन्न जिलों में ब्राह्मण समाज और अन्य संगठनों को संबोधित कर रहे हैं, विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और दिल्ली में आंदोलन की धमकी भी दे चुके हैं।
राजनीतिक हलकों में हलचल, विपक्ष को मौका
अलंकार की यह प्रेस वार्ता यूपी की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है, खासकर 2027 विधानसभा चुनावों से पहले। विपक्षी दल इसे भाजपा सरकार के खिलाफ ब्राह्मण असंतोष का बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में उनका कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा स्वागत भी हुआ है, हालांकि उन्होंने अभी किसी पार्टी से जुड़ने की पुष्टि नहीं की। अलंकार ने पहले भी SC/ST एक्ट और अन्य मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा है। उनकी अगली घोषणा का इंतजार राजनीतिक पर्यवेक्षकों को है, जो राज्य की सियासी तस्वीर बदल सकती है।







































