इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश के पुलिस थानों में बार-बार CCTV कैमरे खराब होने या बंद रहने पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इसे ‘रूटीन सफाई’ बताते हुए स्पष्ट कहा कि अब यह दलील स्वीकार नहीं की जाएगी। कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे खुद पूरे मामले की जांच करें और प्रदेश भर के थानों में CCTV की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
सुल्तानपुर के मोतीगरपुर थाने से जुड़ा मामला
यह प्रकरण सुल्तानपुर जिले के मोतीगरपुर थाने से सामने आया, जहां याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि थाने में CCTV कैमरे अक्सर बंद रहते हैं। याचिका में कहा गया कि कैमरों के निष्क्रिय रहने से पारदर्शिता प्रभावित होती है और इससे गलत गतिविधियों को संरक्षण मिल सकता है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि कई थानों में CCTV केवल कागजों में दर्ज हैं, जमीनी स्तर पर उनकी निगरानी नहीं हो रही।
खंडपीठ की कड़ी टिप्पणियां
जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस बबीता रानी की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि हर बार तकनीकी खराबी का हवाला देना संदेह पैदा करता है। अदालत ने दोहराया कि थानों, लॉकअप और पूछताछ कक्ष में CCTV अनिवार्य हैं और उनकी कार्यशीलता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि शीर्ष पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
राज्य सरकार को विस्तृत रिपोर्ट का आदेश
अदालत ने निर्देश दिया है कि 23 फरवरी तक प्रदेश के सभी थानों में लगे CCTV कैमरों की संख्या, उनकी कार्यस्थिति, खराब कैमरों की मरम्मत और भविष्य की कार्ययोजना का पूरा ब्योरा पेश किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि समय पर संतोषजनक रिपोर्ट दाखिल नहीं हुई, तो मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की याद दिलाई
हाईकोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही थानों में CCTV लगाने के निर्देश दे चुका है। इसके बावजूद यदि कैमरे काम नहीं कर रहे हैं, तो यह गंभीर लापरवाही मानी जाएगी। अगली सुनवाई 23 फरवरी को होगी, जहां राज्य सरकार की ओर से पेश रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।














































