मिडिल ईस्ट में जारी ईरान‑इजरायल संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव ने पड़ोसी पाकिस्तान की रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर पार पहुंचने के बाद पाकिस्तान में फ्यूल संकट गहरा गया है. आयात पर निर्भर पाकिस्तान की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे पेट्रोल‑डीजल महंगे हो गए हैं और सरकार को सख्त कदम उठाने पड़े हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोमवार को बढ़ती तेल कीमतों को देखते हुए खर्चों में कटौती योजना का ऐलान किया है। इसके तहत सरकारी दफ्तर हफ्ते में सिर्फ चार दिन खुलेंगे और आधे कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। इस हफ्ते के अंत से स्कूल दो हफ्तों के लिए बंद रहेंगे। पाकिस्तानी न्यूज चैनल जियो न्यूज के मुताबिक, मंत्रियों और सलाहकारों के विदेश दौरे रोक दिए गए हैं। मंत्री दो महीने तक वेतन नहीं लेंगे और सांसदों की सैलरी में 25% की कटौती होगी। वहीं, पाकिस्तान में अब दो महीने तक सरकारी गाड़ियों को 50% कम ईंधन मिलेगा। 60% सरकारी वाहन नहीं चलेंगे। सभी सरकारी विभाग अपने खर्च में 20% कटौती करेंगे। शरीफ ने कहा कि अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष की वजह से कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गई है। इस वजह से यह निर्णय लिए गए हैं।
पाकिस्तान ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 20% की बढ़ोतरी की है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपए (पाकिस्तानी रुपया) प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत अब 335.86 रुपए प्रति लीटर हो गई है। वहीं डीजल 321.17 रुपए प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है।कीमतों में बढ़ोतरी की खबर आने के बाद होते ही पाकिस्तान के बड़े शहरों जैसे लाहौर और कराची में पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ जमा हो गई। लोग घंटों अपनी बारी का इंतजार करते दिखे। लोगों को डर है कि आने वाले दिनों में कहीं तेल की किल्लत न हो जाए।
पाकिस्तान में पहले से ही कमजोर प्राइस कंट्रोल सिस्टम रमजान के दौरान फेल दिख रहा है. द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार-फर्स्ट‑ग्रेड केले का सरकारी रेट PKR 240 था, पर बाज़ार में PKR 300 में बिके।
अमरूद PKR 145 की जगह PKR 150,
कंधारी अनार PKR 630 की जगह PKR 700,
सेब PKR 420 की जगह PKR 450,
थाई अदरक PKR 280 की जगह PKR 350 तक बेची गई.
कीमतें बढ़ने से लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए अधिक पैसे चुकाने पड़ रहे हैं।
जहां एक तरफ जनता रोजमर्रा की चीजों के लिए महंगाई का बोझ झेल रही है, वहीं देश ऊर्जा संकट से जूझ रहा है. मिडिल ईस्ट की जंग थमने के आसार नजर नहीं आते, जिससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की परेशानियां आगे भी बढ़ सकती हैं. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि दाने‑दाने को तरसता पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय जंग की मार से और भी कमजोर होता जा रहा है।
INPUT-ANANYA MISHRA













































