UP: छात्र संख्या और पाल्य बच्चा अनिवार्यता खत्म करने की मांग, 12 माह का मानदेय और दुर्घटना बीमा की उठाई आवाज

आजमगढ़: अखिल भारतीय मध्यान्ह भोजन रसोइया महासंघ उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मंगलवार को रसोइयों की विभिन्न समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी को छह सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। रसोइयों ने छात्र संख्या कम होने और पाल्य बच्चा अनिवार्यता के आधार पर पूर्व से कार्यरत रसोइयों को हटाए जाने पर नाराजगी जताई और संबंधित शासनादेश में संशोधन की मांग की।

ज्ञापन में कहा गया कि 23 अगस्त 2026 को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित रसोइया सम्मान समारोह में सरकार की ओर से रसोइयों के मानदेय में एक हजार रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, जिसका महासंघ ने स्वागत किया। हालांकि, संगठन का आरोप है कि इसके बाद प्रदेश के विभिन्न जनपदों में छात्र संख्या कम होने तथा पाल्य बच्चा अनिवार्यता के आधार पर पहले से कार्यरत रसोइयों को कार्य से हटाया जा रहा है।

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महासंघ ने मांग की कि छात्र संख्या कम होने की स्थिति में कार्यरत रसोइयों को सेवा से अलग न किया जाए। साथ ही नियुक्ति संबंधी शासनादेश से छात्र संख्या और पाल्य बच्चा अनिवार्यता को समाप्त किया जाए।

रसोइयों ने सम्मानजनक मानदेय की मांग करते हुए कहा कि वर्तमान महंगाई में तीन हजार रुपये के मानदेय से परिवार का पालन-पोषण और बच्चों की शिक्षा कराना मुश्किल है। उन्होंने सेवा सीमा निर्धारित करने, 62 वर्ष की आयु पूरी करने वाली रसोइयों के स्थान पर उनके परिवार के किसी सदस्य को नियुक्त करने तथा सेवा समाप्ति के बाद पेंशन की व्यवस्था करने की मांग भी की।

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ज्ञापन में पूरे 12 माह का मानदेय दिए जाने की मांग प्रमुखता से रखी गई। रसोइयों का कहना है कि वे पूरे शैक्षणिक सत्र में योजना से जुड़े कार्य करते हैं, लेकिन उन्हें केवल 10 माह का मानदेय दिया जाता है। इसके अलावा मध्याह्न भोजन बनाने के अतिरिक्त सफाईकर्मी, चपरासी और माली समेत अन्य कार्य कराए जाने का आरोप लगाते हुए केवल भोजन से संबंधित कार्य लिए जाने की मांग की गई।

महासंघ ने कम से कम 10 दिन का आकस्मिक अवकाश देने की मांग भी की। गैस और लकड़ी पर भोजन बनाते समय दुर्घटना की आशंका को देखते हुए निशुल्क दुर्घटना बीमा कराने तथा दुर्घटना की स्थिति में रसोइया के परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग ज्ञापन में शामिल है।

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