UP: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) देश में सर्वाधिक एक्सप्रेस-वे नेटवर्क विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। फरवरी 2026 तक राज्य में कुल 22 एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें सात एक्सप्रेस-वे पूरी तरह से चालू हो चुके हैं, तीन का निर्माण कार्य जारी है और 12 परियोजनाएं प्रस्तावित या स्वीकृति के विभिन्न चरणों में हैं। इन योजनाओं के पूरा होने के बाद राज्य के अधिकांश जिलों को उच्च स्तरीय सड़क संपर्क से जोड़ा जा सकेगा, जिससे आवागमन और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी ने जापान दौरे के दौरान एक्सप्रेस-वे के किनारे 27 औद्योगिक पार्क विकसित करने की पहल की घोषणा करते हुए निवेशकों को प्रदेश में उद्योग स्थापित करने का आमंत्रण भी दिया।
संचालित एक्सप्रेस-वे ने बदली कनेक्टिविटी की तस्वीर
Purvanchal Expressway, Bundelkhand Expressway, Agra-Lucknow Expressway, Yamuna Expressway, Delhi-Meerut Expressway, Noida-Greater Noida Expressway और Gorakhpur Link Expressway जैसे सात प्रमुख एक्सप्रेस-वे पूरी तरह संचालन में हैं। इन परियोजनाओं ने प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच दूरी को कम किया है और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से तेज संपर्क स्थापित किया है। बेहतर सड़क अवसंरचना के कारण यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे आम नागरिकों और व्यवसायों दोनों को लाभ मिल रहा है।
महत्वाकांक्षी परियोजनाएं
निर्माणाधीन परियोजनाओं में Ganga Expressway को सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण योजना माना जा रहा है। लगभग 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे मेरठ से प्रयागराज तक सीधा संपर्क स्थापित करेगा। इसके अलावा Lucknow-Kanpur Expressway पर भी तेजी से कार्य जारी है। प्रस्तावित परियोजनाओं में करीब 320 किलोमीटर लंबा Vindhya Expressway, जो प्रयागराज से सोनभद्र को जोड़ेगा, विशेष महत्व रखता है। वहीं Gorakhpur-Shamli Expressway जैसी लिंक परियोजनाएं दूरस्थ क्षेत्रों को औद्योगिक मुख्यधारा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएंगी।
औद्योगीकरण को मिलेगा नया प्रोत्साहन
विस्तृत एक्सप्रेस-वे नेटवर्क राज्य में औद्योगिक विकास को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है। बेहतर और तेज परिवहन व्यवस्था से माल ढुलाई की लागत घटेगी तथा समय की बचत होगी। इससे विनिर्माण इकाइयों, वेयरहाउसिंग हब और लॉजिस्टिक्स पार्कों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा। एक्सप्रेस-वे के किनारे औद्योगिक कॉरिडोर और निवेश क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं, जिससे निवेशकों को भूमि, परिवहन और बाजार तक त्वरित पहुंच उपलब्ध होगी।
लॉजिस्टिक्स दक्षता और रोजगार सृजन को बढ़ावा
बेहतर लॉजिस्टिक व्यवस्था से प्रदेश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में इजाफा होगा। निर्यात आधारित उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा, जबकि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। बुंदेलखंड और पूर्वांचल जैसे अपेक्षाकृत पिछड़े क्षेत्रों में बेहतर संपर्क से क्षेत्रीय असंतुलन कम करने में मदद मिलेगी। एक्सप्रेस-वे आधारित विकास मॉडल न केवल अर्थव्यवस्था को गति देगा, बल्कि निर्माण और औद्योगिक निवेश के माध्यम से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।





































