UP: कानपुर यूनिट की विजिलेंस टीम ने वाणिज्य कर विभाग के सेवानिवृत्त अतिरिक्त आयुक्त केशव लाल (Keshav Lal) के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई उनकी सेवा के दौरान ज्ञात आय की तुलना में भारी संपत्ति और खर्च के सामने आने के बाद की गई। जांच में उनके खिलाफ कुल संपत्ति 100 करोड़ रुपये से अधिक पाए जाने की पुष्टि हुई है।
नोट और ज्वेलरी छुपाने का मामला
साल 2017 में नोएडा स्थित उनके आवास पर आयकर विभाग की छापेमारी के दौरान उनके घर से भारी मात्रा में नकदी और सोने की ज्वेलरी बरामद हुई थी। जांच के दौरान पता चला कि पैसे बिस्तर, अलमारी, पूजा घर और बाथरूम के फ्लश में भी छिपाए गए थे। उस समय उन्होंने इन धनराशियों का संतोषजनक हिसाब नहीं पेश किया।
कई शहरों में फैली संपत्ति
विजिलेंस की जांच में यह सामने आया कि केशव लाल ने उत्तर प्रदेश के कई बड़े शहरों में करोड़ों रुपये का निवेश किया। उनके पास लखनऊ में दो आलीशान मकान हैं, जबकि कानपुर, प्रयागराज, गाजियाबाद और नोएडा में भी बड़े प्लॉट और घर मौजूद हैं। इन अचल संपत्तियों के दस्तावेज मिलने के बाद इन्हें भ्रष्टाचार से अर्जित माना गया।
आय के मुकाबले खर्च में भारी अंतर
जांच रिपोर्ट के अनुसार, केशव लाल की वैध स्रोतों से कमाई उनके पूरे करियर में मात्र 1.34 करोड़ रुपये थी। इसके बावजूद उन्होंने 18.27 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च और निवेश किया। यह उनके वास्तविक आय से लगभग 17.26 करोड़ रुपये अधिक है, जो स्पष्ट गड़बड़ी को दर्शाता है।
सरकारी कार्रवाई और जबरन सेवा समाप्ति
जांच में मिली जानकारी और 100 करोड़ रुपये की अनुमानित संपत्ति को देखते हुए सरकार ने उन्हें 2017 में ही जबरन सेवानिवृत्त कर दिया। इसके बाद अगस्त 2023 से चल रही विस्तृत जांच के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई।














































