किडनी ट्रांसप्लांट से लिवर के सौदे तक….कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट मामले में नया खुलासा

कानपुर (Kanpur) में सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट (Kidney Transplant Racket) की जांच अब और गहरी होती जा रही है। पुलिस को मिले सुराग बताते हैं कि इस गिरोह के तार अवैध लिवर ट्रांसप्लांट (Liver Transplant) से भी जुड़े हो सकते हैं। आरोपी शिवम अग्रवाल के मोबाइल फोन से टेलीग्राम के तीन संदिग्ध ग्रुप मिले हैं, जिनमें ‘किडनी डोनर’, ‘किडनी एजेंट्स’ और ‘लिवर पार्ट डोनर’ शामिल हैं। पुलिस ने इस नए एंगल पर अलग से जांच शुरू कर दी है।

टेलीग्राम ग्रुप से खुल रहे नेटवर्क के राज

जांच में पता चला है कि इन ग्रुप्स के जरिए लोगों को जोड़कर निजी संदेशों के माध्यम से बातचीत की जाती थी। ‘लिवर पार्ट डोनर’ ग्रुप में शिवम अग्रवाल, अली और डॉ. रोहित समेत कई लोग जुड़े हुए थे। पुलिस को शक है कि इन ग्रुप्स के जरिए अवैध ट्रांसप्लांट के लिए डोनर और रिसीवर की तलाश की जाती थी। कई सदस्य अब ग्रुप छोड़ चुके हैं, जिससे जांच और जटिल हो गई है।

अली के जरिए हुआ कनेक्शन, कोड वर्ड का इस्तेमाल

किडनी डोनर ग्रुप में शामिल आयुष का संपर्क अली के माध्यम से हुआ था, जिसने उसे मेरठ की टीम से मिलवाया। जांच में यह भी सामने आया है कि ग्रुप में कोड वर्ड और संदिग्ध संदेशों का इस्तेमाल होता था। फिलहाल तीनों ग्रुप्स में सैकड़ों सदस्य होने की बात सामने आई है, जिनकी पहचान की जा रही है।

डॉ. रोहित के कई नंबर, अलग-अलग शहरों में संपर्क

पुलिस को जानकारी मिली है कि डॉ. रोहित चार अलग-अलग मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करता था। इनमें से तीन नंबर केवल व्हाट्सएप कॉलिंग के लिए थे, जबकि एक निजी बातचीत के लिए रखा गया था। बताया जा रहा है कि उसने कानपुर, मेरठ और लखनऊ के लिए अलग-अलग नंबर इस्तेमाल किए।

लखनऊ से आए डॉक्टरों पर भी शक

जांच में यह खुलासा हुआ है कि 29 मार्च को आहूजा हॉस्पिटल में हुए ऑपरेशन के दौरान लखनऊ से तीन डॉक्टर आए थे। इनमें से एक बड़े अस्पताल से जुड़ा बताया जा रहा है, जबकि बाकी दो निजी प्रैक्टिस करते हैं। पुलिस इन डॉक्टरों की पहचान और भूमिका की पुष्टि करने में जुटी है।

लगातार गिरफ्तारी, नए खुलासे जारी

इस मामले में अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें ओटी स्टाफ और तकनीशियन भी शामिल हैं। परवेज सैफी की गिरफ्तारी के बाद कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस के अनुसार, ऑपरेशन के बाद अलग-अलग शहरों के लिए तीन कारें रवाना हुई थीं। जांच टीमें लखनऊ और एनसीआर क्षेत्र में साक्ष्य जुटाने में लगी हैं, और हर दिन नए तथ्य सामने आ रहे हैं।

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