योगी कैबिनेट की बड़ी सौगात: यूपी के 10-15 लाख शिक्षकों, शिक्षामित्रों, रसोइयों को कैशलेस मेडिकल सुविधा मिलेगी, 5 लाख तक इलाज मुफ्त

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गुरुवार (29 जनवरी 2026) को शिक्षा विभाग से जुड़े लाखों कर्मचारियों को बड़ी राहत दी। कैबिनेट बैठक में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और अन्य कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा उपचार योजना पर मुहर लगा दी गई। इस योजना से राज्य भर में लगभग 10 से 15 लाख लाभार्थी (शिक्षक और उनके परिवार) फायदा उठा सकेंगे। इलाज की सीमा 5 लाख रुपये तक होगी, और अस्पताल में नकद भुगतान की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शिक्षक दिवस पर घोषित योजना को लागू करने का हिस्सा है। कैबिनेट में कुल 29-30 प्रस्तावों पर मुहर लगी, जिसमें ड्राइविंग लाइसेंस की फेसलेस सुविधा और अन्य विकास परियोजनाएं भी शामिल हैं।

लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में शिक्षा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक फैसला लिया गया। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने प्रेस वार्ता में बताया कि कैबिनेट ने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभागों के तहत आने वाले सभी शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए कैशलेस मेडिकल ट्रीटमेंट स्कीम को मंजूरी दे दी है।

यह योजना राज्य कर्मचारियों की तर्ज पर बनाई गई है और आयुष्मान भारत जैसी व्यवस्था पर आधारित है। लाभार्थियों को पैनल में शामिल अस्पतालों में इलाज पूरी तरह कैशलेस मिलेगा—यानी अस्पताल में कोई नकद भुगतान नहीं करना होगा, सरकार सीधे खर्च वहन करेगी। इलाज की अधिकतम सीमा 5 लाख रुपये प्रति वर्ष बताई गई है।

लाभार्थियों की संख्या और श्रेणियां

 बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षक: 4,34,426
 सरकारी सहायता प्राप्त जूनियर हाई स्कूलों के शिक्षक: 13,380
 स्व-वित्तपोषित मान्यता प्राप्त स्कूलों के शिक्षक: 4,72,735
 शिक्षामित्र: 1,42,929
 उच्च प्राथमिक स्कूलों के प्रशिक्षक/अनुदेशक: 24,717
 वार्डन: 7,479
 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के शिक्षक
 प्रधानमंत्री पोषण योजना (मिड-डे मील) के रसोइये: 97,344
 विशेष शिक्षक: 2,00,581

बेसिक शिक्षा क्षेत्र में कुल 11,95,391 लाभार्थी शामिल हैं, जिन पर अनुमानित खर्च 358.61 करोड़ रुपये सालाना होगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग के लगभग 3 लाख शिक्षकों (एडेड और सेल्फ फाइनेंस स्कूलों सहित) को भी इसी तरह की सुविधा मिलेगी। कुल मिलाकर 10-15 लाख लोग (शिक्षक + परिवार) लाभान्वित होंगे।

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यह फैसला शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है, जिससे आपात स्थिति में इलाज के लिए कर्ज लेने या जेब से खर्च करने की मजबूरी खत्म हो जाएगी। कैबिनेट ने अन्य प्रस्तावों पर भी मुहर लगाई, जैसे ड्राइविंग लाइसेंस की फेसलेस सुविधा, विधानसभा का बजट सत्र (9 फरवरी से शुरू, 11 को बजट पेश), इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति में संशोधन, और अन्य विकास परियोजनाएं।

शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और शिक्षामित्रों ने इस फैसले का स्वागत किया है, इसे योगी सरकार की शिक्षक-केंद्रित नीतियों की जीत बताया जा रहा है। योजना जल्द लागू होने की उम्मीद है, और इसके लिए पैनल अस्पतालों की सूची और प्रक्रिया जल्द जारी की जाएगी।

INPUT-ANANYA MISHRA

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