उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया तूफान उठा है, जो धर्म, संतों के सम्मान और सत्ता की राजनीति को जोड़ता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज (प्रयागराज) में माघ मेले के दौरान कुछ ‘कालनेमि’ जैसे तत्वों पर निशाना साधा, जिन्हें उन्होंने सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रचने वाला बताया। वहीं, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के चरणों में प्रणाम कर संतों के प्रति सम्मान जताया। यह घटना योगी सरकार और कुछ संतों के बीच चल रहे तनाव के बीच हुई है, जहां योगी ने ‘कालनेमि’ जैसे शब्द से प्रहार किया, जबकि केशव ने प्रणाम कर स्पष्ट किया कि संत क्या होते हैं और उनका सम्मान कैसे किया जाता है। साथ ही, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि केशव के इस बयान से योगी पर अप्रत्यक्ष ‘सुदर्शन चक्र’ चला दिया गया – एक ही वाक्य में संदेश दे दिया!
योगी का ‘कालनेमि’ प्रहार: सनातन विरोधियों पर वार
माघ मेले के दौरान प्रयागराज में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “बहुत से कालनेमि धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर कर रहे हैं।” उन्होंने साफ चेतावनी दी कि ऐसे लोग सनातन को नुकसान पहुंचाने की साजिश रच रहे हैं। यह टिप्पणी ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद के संदर्भ में आई, जहां प्रशासन ने उनके माघ मेले शिविर पर नोटिस चस्पा किया, मौनी अमावस्या स्नान रोकने की कोशिश की गई, और उन्हें बैन करने की चेतावनी दी गई। योगी ने कहा कि ऐसे लोग कुंभ जैसी महान परंपरा को मेला तक सीमित कर रहे हैं, जबकि सनातन की शक्ति से करोड़ों श्रद्धालु जुड़ते हैं। योगी का यह बयान ‘कालनेमि’ (रामायण में रावण का सहयोगी, जो छल से धर्म को कमजोर करने वाला था) से प्रतीकात्मक प्रहार था – सनातन विरोधियों को लक्ष्य बनाते हुए।
केशव प्रसाद मौर्य का प्रणाम: संत सम्मान का स्पष्ट संदेश
योगी के बयान के कुछ घंटों बाद ही आजमगढ़ पहुंचे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों में प्रणाम किया। उन्होंने कहा: “पूज्य शंकराचार्य के चरणों में प्रणाम है।”
“मैं ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों में प्रणाम करता हूं।”
यह बयान योगी के ‘कालनेमि’ वाले प्रहार के ठीक विपरीत था। केशव ने स्पष्ट कर दिया कि संत क्या होते हैं – उनका सम्मान सर्वोपरि है, और राजनीति में भी संतों का अपमान नहीं किया जा सकता। विश्लेषकों का कहना है कि केशव ने एक ही वाक्य में ‘सुदर्शन चक्र’ चला दिया – योगी सरकार के संतों से तनाव को उजागर करते हुए खुद को संत-भक्त के रूप में पेश किया। यह बीजेपी के भीतर संतों vs सत्ता के मुद्दे पर अलग रुख दिखाता है।
विवाद की जड़: माघ मेले में शंकराचार्य vs प्रशासन
यह सब माघ मेले 2026 के दौरान शुरू हुआ। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (जिन्हें PM मोदी ने भी आशीर्वाद लिया था) के शिविर पर प्रशासन ने नोटिस चस्पा किया, 48 घंटे में जवाब मांगा, और कहा कि उनके कृत्यों से व्यवस्था छिन्न-भिन्न हुई। योगी सरकार ने उन्हें ‘शंकराचार्य’ मानने से इनकार किया और सुविधाएं रद्द करने की धमकी दी। कुछ संतों ने योगी पर ‘संत अपमान’ का आरोप लगाया। केशव का प्रणाम इसी विवाद में आया, जो संतों के पक्ष में मजबूत संदेश देता है।
राजनीतिक निहितार्थ:
* बीजेपी में संत vs सत्ता का टकराव?
* योगी का रुख: सनातन की रक्षा, लेकिन प्रशासनिक सख्ती।
* केशव का रुख: संतों का सम्मान, प्रणाम से भावनात्मक जुड़ाव।
यह घटना यूपी बीजेपी में योगी-केशव के बीच पुराने मनमुटाव को फिर से उजागर करती है। सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि केशव ने ‘एक वाक्य में सुदर्शन चक्र’ चलाया – योगी पर अप्रत्यक्ष प्रहार करते हुए संतों का साथ दिया। यह 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के लिए चुनौती बन सकता है, जहां संतों का वोट बैंक महत्वपूर्ण है।
INPUT-ANANYA MISHRA














































