गोरखपुर के फर्जी IPS की असली कहानी सुन आप रह जाएगें दंग!

गोरखपुर में एक बार फिर फर्जी IPS अधिकारी का मामला सामने आया है, जिसकी असली कहानी सुनकर लोग दंग रह गए। यह शख्स शनि शर्मा है, जो खुद को IPS अधिकारी बताकर कपड़ा कारोबारी से 2 लाख रुपये की रंगदारी मांग रहा था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, लेकिन जांच में पता चला कि यह पहले भी कई अपराधों में जेल जा चुका है और कभी डीडीयू गोरखपुर में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (चपरासी/लिपिक) था।

फर्जी IPS बनकर रंगदारी का मामला

पीपीगंज क्षेत्र में शनि शर्मा ने IPS की वर्दी पहनकर एक कपड़ा व्यापारी से संपर्क किया और 2 लाख रुपये मांगे। उसने धमकी दी कि पैसे नहीं दिए तो हत्या का केस लगा देगा और एनकाउंटर करवा देगा। व्यापारी ने पुलिस को सूचना दी, तो पुलिस ने जाल बिछाकर उसे गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि वह फर्जी IPS बनकर भौकाल जमाता था और कई लोगों से ठगी कर चुका है।

पहले भी जेल जा चुका, अपहरण का केस

शनि शर्मा की क्रिमिनल हिस्ट्री काफी पुरानी है। वह अपनी पत्नी की बहन (साली) के बेटे का अपहरण कर नेपाल भाग गया था। वहां से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और जेल भेजा। अपहरण के इस केस में उसे सजा भी हुई। इसके अलावा ठगी, रंगदारी और अन्य मामलों में उसका नाम जुड़ा है।

Also read.श्रावस्ती में बुलडोजर की गरज, अवैध मजार और भवन ढहाए गए

डीडीयू में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रहते हुए फर्जीवाड़ा

शनि शर्मा गोरखपुर के दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयू) में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (चपरासी/क्लर्क) था। वहां रहते हुए उसने फर्जी एडमिशन के नाम पर छात्रों से लाखों रुपये ऐंठे। कई छात्रों को फर्जी तरीके से एडमिशन दिलाने का वादा कर पैसे लिए, लेकिन बाद में पकड़ा गया। इस मामले में विश्वविद्यालय ने उसे सस्पेंड कर दिया। UPI स्कैम और अन्य फर्जीवाड़े में भी उसका हाथ था।

कैसे बनता था फर्जी IPS का भौकाल

शनि शर्मा ने रील्स और सोशल मीडिया देखकर फर्जी IPS का रोल अदा करना शुरू किया। वह वर्दी, गनर और प्रोटोकॉल के साथ घूमता था। उसकी दो शादियां हुईं और कई रिश्तेदारों से जुड़े अपराध किए। गिरफ्तारी के बाद उसकी असलियत खुल गई, जिससे लोग हैरान हैं कि एक चपरासी कैसे इतने बड़े फर्जीवाड़े में शामिल हो गया।

पुलिस का क्या कहना

गोरखपुर पुलिस अब उसके अन्य ठगी के मामलों की जांच कर रही है। कई पीड़ित सामने आ चुके हैं। पुलिस का कहना है कि वह लंबे समय से ऐसे फर्जीवाड़े में लगा था। इस घटना ने एक बार फिर फर्जी अफसरों के बढ़ते खतरे को उजागर किया है। लोग कह रहे हैं कि ऐसी कहानियां सुनकर अब किसी पर आसानी से भरोसा नहीं होता।

INPUT-MUKESH KUMAR

देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं.