बाराबंकी: तहसील रामनगर क्षेत्र के ग्राम पंचायत लहड़रा में बृहस्पतिवार को घाघरा-सरयू नदी के बढ़े जलस्तर का असर साफ दिखाई दिया। बाढ़ का पानी किसानों के खेत-खलिहानों तक पहुंच गया है। धान और गन्ने की फसलें पानी में डूब गई हैं। वहीं डामर संपर्क मार्ग के बीच से होकर पानी खेतों की ओर जाता दिखाई दिया। खेतों में जलभराव और फसलों की बर्बादी देखकर किसान मायूस नजर आए।
बारिश और तेज हवाओं के साथ आई बाढ़ ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। खेतों में खड़ी गन्ने की फसल पानी भरने के कारण गिर गई है, जबकि धान की फसल भी जलमग्न हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि खेती पर निर्भर परिवारों के सामने अब आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई किसान पहले से ही कर्ज के बोझ में हैं और फसल बर्बाद होने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है।
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ग्राम पंचायत लहड़रा में जगह-जगह पानी भरने से ग्रामीणों को आवागमन में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। डामर संपर्क मार्ग पर पानी बहने से पैदल चलने वाले लोगों के साथ स्कूली बच्चों और महिलाओं को परेशानी हो रही है। जलभराव के कारण पशुओं को चराने के लिए ले जाने में भी ग्रामीणों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीण महिला सुंदरी ने बताया कि गांव में बाढ़ का पानी भर जाने से बहुत परेशानी उठानी पड़ रही है। शौचालय जाने तक में दिक्कत हो रही है। खेतों में पानी भरने से फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं।
ग्रामीण वासुदेव यादव ने बताया कि ग्राम पंचायत में बाढ़ से काफी नुकसान हुआ है। धान, गन्ने समेत सभी प्रमुख फसलें पानी में डूबी हुई हैं। पशुओं को चारा और चराने के लिए ले जाने में भी परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि अभी तक गांव में किसी प्रकार की बाढ़ राहत सामग्री नहीं पहुंचाई गई है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और तहसील प्रशासन से बाढ़ प्रभावित किसानों की फसलों का तत्काल सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है, ताकि फसल बर्बाद होने से परेशान किसानों को आर्थिक राहत मिल सके।














