बलिया: जिले में अपने एसी कार्यालय से जिला अधिकारी को उस वक्त बाहर आना पड़ा, जब भारी संख्या में छात्र-छात्राएं अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते हुए पहुंचे। दरअसल कलेक्ट्रेट परिसर में सोमवार को पूर्वांचल छात्र संघर्ष समिति के बैनर तले छात्र-छात्राओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
समिति के संयोजक नागेंद्र बहादुर सिंह झुन्नू के नेतृत्व में सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह को सौंपा। ज्ञापन लेते हुए जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने छात्रों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगें शासन स्तर तक पहुंचाई जाएंगी और जो मामले स्थानीय प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, उनका त्वरित निस्तारण किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान छात्र नेता अविनाश सिंह नंदन ने सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अडानी-अंबानी के बच्चे नहीं, बल्कि गरीब किसानों के बेटे-बेटियां पढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि एक दशक में कॉलेजों की फीस कई गुना बढ़ गई, लेकिन छात्रवृत्ति की राशि में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं हुई। उल्टे पिछले कई सत्रों से छात्रों को मिलने वाली नियमित छात्रवृत्ति और स्मार्टफोन/टैबलेट वितरण पर रोक जैसी स्थिति बनी हुई है।
छात्र नेताओं ने प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी और किसानों की बदहाली का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। समिति ने शासन के अपनी मांगों को रखा। मांग किया कि विभिन्न विभागों में वर्षों से लंबित रिक्त पदों पर तत्काल नई भर्तियां निकाली जाएं। महंगाई और फीस वृद्धि को देखते हुए स्नातक व परास्नातक छात्रों की छात्रवृत्ति राशि दोगुनी की जाए और समय पर भुगतान हो।
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उच्च शिक्षा के सभी पात्र छात्र-छात्राओं को तत्काल डिजिटल उपकरण बांटे जाएं। बाढ़ और सूखे की मार झेल रहे किसानों का संपूर्ण कर्ज माफ किया जाए।किसानों व आम जनता को 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाए और रोस्टिंग से मुक्ति दिलाकर नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो।
छात्र नेताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि 8 अक्टूबर तक उनकी न्यायोचित मांगों पर शासन द्वारा ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 9 अक्टूबर को पूरे जनपद में चक्का जाम कर बलिया बंद किया जाएगा जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।














