बिजनौर: 2 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय में जिलाध्यक्ष हनी फैसल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदाता डेटाबेस और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि यदि मतदाता सूची या निर्वाचन प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
संवैधानिक जिम्मेदारी और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल
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हनी फैसल ने कहा कि समाजवादी पार्टी किसी व्यक्ति के निजी जीवन या चरित्र को लेकर टिप्पणी नहीं कर रही है। पार्टी का सवाल मुख्य निर्वाचन आयुक्त के संवैधानिक दायित्व और चुनावी प्रक्रिया में जवाबदेही से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची और SIR से जुड़े हालिया विवादों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
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वोटर-रोल सॉफ्टवेयर की समीक्षा का मुद्दा
सपा जिलाध्यक्ष ने मतदाता सूची के सॉफ्टवेयर और उसके इस्तेमाल को लेकर सामने आए सवालों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, Reuters की रिपोर्ट में बताया गया है कि निर्वाचन आयोग ने मतदाता-रोल सॉफ्टवेयर की कानूनी और तकनीकी समीक्षा के लिए समिति गठित करने का निर्णय लिया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि दो निर्वाचन आयुक्तों ने करीब दस महीने के दौरान कई बार मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाए थे।
13 करोड़ से अधिक नाम हटने की रिपोर्ट पर सवाल
हनी फैसल ने दावा किया कि SIR के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक नाम बाहर होने की रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी यह दावा नहीं कर रही कि ये सभी नाम स्थायी रूप से मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उनका सवाल इस बात को लेकर है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के पीछे के कारणों का पूरा विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है।
दावे-आपत्तियों और लंबित मामलों का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग
सपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि जनता के सामने जिलावार नाम हटाए जाने के आंकड़े, दावे-आपत्तियों की स्थिति, दोबारा जोड़े गए नाम और लंबित मामलों का विस्तृत ब्योरा रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों में पारदर्शिता होने से निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का तथ्यात्मक समाधान संभव होगा।



