‘पति के कातिल का जहन्नुम टिकट कटने की खुशी…’, पूजा पाल का अखिलेश को करारा जवाब

उत्तर प्रदेश की कौशांबी की चायल सीट से सपा विधायक पूजा पाल को समाजवादी पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया। गुरुवार को विधानसभा सत्र के दौरान पूजा पाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कानून-व्यवस्था के लिए सराहना की और विशेष रूप से माफिया अतीक अहमद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, मेरे पति के हत्यारे अतीक अहमद को मुख्यमंत्री ने मिट्टी में मिलाने का काम किया। स्पीच के करीब आठ घंटे बाद ही उन्हें पार्टी से निकालने का आदेश जारी कर दिया गया।

सपा नेताओं के तंज

सपा नेताओं ने भी पूजा पाल पर तंज कसे। अखिलेश यादव ने कहा कि वह अब बीजेपी में अपना टिकट पक्का करवा लें, जबकि शिवपाल यादव ने दावा किया कि वह अब कभी विधायक नहीं बन पाएंगी और उन्हें पार्टी अनुशासन में रहना चाहिए था। सपा विधायक रागिनी सोनकर ने आरोप लगाया कि पूजा पाल ने पार्टी के भरोसे चुनाव जीतकर उसी को धोखा दिया है।

पूजा पाल को मिला बीजेपी नेताओं का समर्थन

सपा की कार्रवाई के बाद बीजेपी नेताओं ने सपा पर तीखा हमला बोला। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस कदम को ‘अत्यंत निंदनीय’ बताते हुए कहा कि पूजा पाल के पति की हत्या सपा के संरक्षण में पनपे गुंडों ने की थी। कैबिनेट मंत्री नितिन अग्रवाल ने याद दिलाया कि राज्यसभा चुनाव में पूजा पाल ने बीजेपी के पक्ष में मतदान किया था और आरोप लगाया कि सपा सकारात्मक सोच वाले नेताओं को बर्दाश्त नहीं करती। मंत्री जयेन्द्र प्रताप सिंह राठौर ने कहा कि सपा को विधायक की बात को सकारात्मक रूप से लेना चाहिए था, जबकि बीजेपी विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा की, पूजा पाल को पार्टी से बाहर कर दिया गया वो भी अतीक अहमद के लिए, यही समाजवाद है ।

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पूजा पाल ने सोशल मीडिया पर लिखा:

पूजा पाल ने सपा से निष्कासन के बाद तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें चुनावी सीट की कोई चिंता नहीं, बल्कि अपने पति के हत्यारों का “टिकट जहन्नुम के लिए कटने” की खुशी है। उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करना स्वार्थ की राजनीति नहीं, बल्कि एक पीड़ित के तौर पर उनकी जिम्मेदारी थी। सपा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने लिखा कि काश, एक बार उन माफिया और दुर्दांत अपराधियों के लिए भी निंदा के शब्द कहे जाते। उन्होंने इसे ऐसा समाजवाद बताया जिसमें एक पीड़ित महिला को सच बोलने पर अपमानित किया जाता है। अतीक अहमद के अंत पर उन्होंने कहा कि जब राजू पाल की हत्या हुई थी, तब सपा के लोग कानून-व्यवस्था पर हल्ला मचा रहे थे, लेकिन जब सीएम योगी ने माफिया को मिट्टी में मिलाने का ऐलान किया और अतीक का अंत हुआ, तो सबसे ज्यादा दर्द इन्हीं लोगों को हुआ।

15 अगस्त को भी किया योगी का समर्थन

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर पूजा पाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक वीडियो साझा करते हुए उनकी कानून-व्यवस्था की सराहना की ।

कुछ यूजर्स ने किया समर्थन तो कुछ ने किया ट्रोल 

इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं—कुछ यूजर्स ने उनका समर्थन किया, तो कुछ ने उन्हें ट्रोल किया। एक यूजर राजू ने लिखा कि ओबीसी समाज से आने वाली महिला विधायक पूजा पाल को सच बोलने पर समाजवादी पार्टी से निकाल दिया गया है। वहीं, एक अन्य यूजर ‘Saitan Bhagat’ ने तंज कसते हुए लिखा कि कभी राजू पाल नाम का एक खूंखार हिस्ट्रीशीटर भी था, जिसकी मौत का फायदा उठाकर उसकी पत्नी राजनीति में आईं, बाद में दूसरी शादी कर ली, और शादी के बाद भी समय-समय पर अपने पहले पति की मौत का राजनीतिक लाभ उठाती रहती हैं।

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राजू पाल हत्याकांड

प्रयागराज से बसपा नेता राजू पाल की 25 जनवरी 2005 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनकी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता अतीक अहमद के भाई अशरफ से थी। नवंबर 2004 के उपचुनाव में राजू पाल ने अशरफ को हराकर जीत दर्ज की थी। इस हत्या के बाद ही पूजा पाल राजनीति में सक्रिय हुईं।

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