प्रयागराज (Prayagraj) में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Avimukteshwaranand) के गंगा स्नान को लेकर चल रहे विवाद पर अब किसान नेता राकेश टिकैत ने भी प्रतिक्रिया दी है। सोमवार, 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुजफ्फरनगर के पुरकाजी क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम के दौरान टिकैत ने कहा कि शंकराचार्य को गंगा स्नान करवा देना चाहिए, क्योंकि यदि संत और किसान नाराज हुए तो इसका असर पूरे देश पर पड़ेगा।
‘ऋषि और कृषि का देश है भारत’
मीडिया से बातचीत में राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने साफ शब्दों में कहा कि भारत ऋषि और कृषि की परंपरा वाला देश है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब-जब ऋषि और किसानों के साथ छेड़छाड़ होगी, तब-तब देश में हलचल पैदा होगी। टिकैत के मुताबिक संत समाज और किसान अगर एक साथ असंतुष्ट हुए तो हालात गंभीर हो सकते हैं।
गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में दिया बयान
गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित भव्य समारोह में शामिल होने पहुंचे राकेश टिकैत ने प्रयागराज के घटनाक्रम पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने दोहराया कि प्रशासन को चाहिए था कि शंकराचार्य को स्नान की अनुमति देकर विवाद को वहीं खत्म कर देता, ताकि आस्था और व्यवस्था के बीच टकराव की स्थिति न बनती।
क्या है शंकराचार्य विवाद?
दरअसल यह विवाद प्रयागराज के माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के दिन सामने आया, जब संगम तट पर भारी भीड़ थी। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के चलते किसी भी तरह के वीआईपी प्रोटोकॉल की अनुमति नहीं थी। आरोप है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने समर्थकों के साथ बिना अनुमति पालकी में स्नान स्थल की ओर बढ़े और बैरिकेडिंग तोड़ दी, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। तभी से इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।









































