बलिया को मिली बड़ी सौगात! वीर लोरिक की स्मृति में बनेगा 350 सीटों वाला हाईटेक सभागार

बलिया: उत्तर प्रदेश के बलिया में लोकनायक और महापुरुष वीर लोरिक की विरासत को संरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्रदेश सरकार की पहल पर संस्कृति विभाग द्वारा वीर लोरिक की स्मृति से जुड़े क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं से युक्त भव्य सभागार का निर्माण कराया जा रहा है। राजस्व ग्राम हसनपुरा, पोस्ट बिसौली और तहसील बांसडीह में बनने वाली इस परियोजना पर करीब 4.97 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

1.36 करोड़ की पहली किस्त जारी, शुरू हुआ निर्माण

परियोजना के लिए शासन की ओर से 1.36 करोड़ रुपये की पहली किश्त जारी की जा चुकी है। प्रस्तावित सभागार में एक साथ करीब 350 दर्शकों के बैठने की व्यवस्था होगी। निर्माण कार्य के तहत सभागार के फाउंडेशन का काम शुरू हो गया है। भवन को फायर-प्रूफ बनाया जाएगा, ताकि यहां सांस्कृतिक आयोजनों के दौरान कलाकारों और दर्शकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। साथ ही जलापूर्ति जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी प्रबंध किया जाएगा।

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हाईटेक सुविधाओं से लैस होगा सभागार

वीर लोरिक की स्मृति में बनने वाले इस सभागार को स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए आधुनिक तकनीक से तैयार किया जाएगा। इसमें बेहतर ध्वनि के लिए साउंड रीइन्फोर्समेंट सिस्टम, एचडी सिनेमैटिक प्रोजेक्शन और एलईडी इंटेलिजेंट स्टेज लाइटिंग की सुविधा होगी। मंच पर मोटराइज्ड कर्टन और फैब्रिकेशन सिस्टम भी लगाया जाएगा। इसके अलावा दर्शकों के बेहतर अनुभव के लिए एकॉस्टिकल ट्रीटमेंट और इंटीरियर से जुड़े विशेष कार्य किए जाएंगे।

आईएस कोड और सीपीडब्ल्यूडी मानकों के अनुरूप होगा निर्माण

भवन का निर्माण आरसीसी फ्रेम्ड स्ट्रक्चर के आधार पर किया जाएगा। इसकी डिजाइन भारतीय मानक यानी आईएस कोड के अनुरूप तैयार की जाएगी। परियोजना के निर्माण से जुड़े कार्य केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) की निर्धारित स्पेसिफिकेशन अथवा संबंधित विभाग के तय मानकों के अनुसार कराए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य सभागार को ऐसा आधुनिक मंच बनाना है, जहां स्थानीय कलाकारों को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

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भोजपुरी लोक महाकाव्य ‘लोरिकायन’ के नायक हैं वीर लोरिक

वीर लोरिक का संबंध बलिया जिले के सिकंदरपुर तहसील के गौरा गांव से बताया जाता है। उन्हें भोजपुरी लोक महाकाव्य ‘लोरिकायन’ का प्रमुख नायक माना जाता है। लोककथाओं में वीर लोरिक को अपनी असाधारण शक्ति और वीरता के लिए याद किया जाता है। उन्हें अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करने वाले योद्धा के रूप में लोक परंपराओं में विशेष स्थान प्राप्त है।

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