इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा प्रशासनिक फैसला: 408 ADJ स्तर के जजों का बड़े पैमाने पर तबादला

उत्तर प्रदेश : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया है। वार्षिक स्थानांतरण-2026 के तहत 408 अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) स्तर के न्यायिक अधिकारियों के तबादले कर दिए गए हैं। इस सूची में गाजियाबाद के दो प्रमुख अधिकारियों का स्थानांतरण शामिल है। गौरव शर्मा को गाजियाबाद के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पद से हटाकर लखनऊ में भ्रष्टाचार निवारण (Vigilance Bureau-UPSEB) के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश के पद पर भेजा गया है, जबकि नीतू पाठक को परिवार न्यायालय की अपर प्रधान न्यायाधीश पद से स्थानांतरित कर लखनऊ में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) नियुक्त किया गया है।


तबादलों का उद्देश्य

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, निष्पक्ष तथा चुस्त बनाने के लिए यह वार्षिक स्थानांतरण किया है। कुल 1086 न्यायिक अधिकारियों (408 ADJ, सिविल जज सीनियर डिवीजन और जूनियर डिवीजन सहित) के तबादले की प्रक्रिया चल रही है। हाईकोर्ट के कार्यालय ज्ञापन संख्या 191/Admin (Services)/2026 के अनुसार, सभी प्रभावित अधिकारियों को 15 अप्रैल 2026 की दोपहर तक अपने वर्तमान पद का प्रभार सौंपना होगा और नए स्थान पर कार्यभार ग्रहण करना होगा।

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गौरव शर्मा का तबादला

गौरव शर्मा (आईडी UP6276) गाजियाबाद में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर तैनात थे। अब उन्हें लखनऊ में भ्रष्टाचार निवारण विभाग (Vigilance Bureau – U.P.S.E.B.) के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया है। यह तबादला विशेष न्यायिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


नीतू पाठक का तबादला

नीतू पाठक गाजियाबाद के परिवार न्यायालय में अपर प्रधान न्यायाधीश के पद पर कार्यरत थीं। अब उन्हें लखनऊ में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) के पद पर स्थानांतरित किया गया है। परिवार न्यायालय से सामान्य ADJ पद पर यह बदलाव न्यायिक प्रशासन में विविधता लाने की दिशा में देखा जा रहा है।

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अन्य प्रमुख बातें

– इस वर्ष कुल 266 से 408 ADJ स्तर के तबादले किए गए हैं (विभिन्न रिपोर्ट्स में संख्या थोड़ी भिन्न है)।
– तबादले मुख्य रूप से कार्यक्षेत्र सुधार, अनुभव वितरण और न्यायिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से किए गए हैं।
– हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कोई भी अधिकारी 15 अप्रैल 2026 के बाद पुराने पद पर नहीं रहेगा।

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