बलिया: जनपद बलिया के ग्रामीण क्षेत्रों में चरमराई विद्युत व्यवस्था और विभागीय उदासीनता के खिलाफ जनआक्रोश सड़कों पर उतर आया है। सुखपुरा एवं देल्हुआ विद्युत उपकेंद्रों से जुड़े दर्जनों गांवों में जारी भीषण विद्युत संकट को लेकर ‘पूर्वांचल छात्र संघर्ष समिति’ के बैनर तले सैकड़ों ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं ने बांसडीह तहसील मुख्यालय पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उपजिलाधिकारी बांसडीह को मांग पत्र सौंपा और चेतावनी दी कि यदि जल्द व्यवस्था दुरुस्त न हुई तो उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।
धरने को संबोधित करते हुए समिति के संयोजक एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष नागेंद्र बहादुर सिंह ‘झुन्नू’ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के स्पष्ट शासनादेश के अनुसार जिला मुख्यालय पर 24 घंटे, तहसील मुख्यालय पर 20 घंटे और ग्रामीण इलाकों में न्यूनतम 18 घंटे अनवरत विद्युत आपूर्ति का प्रावधान है। इसके उलट सुखपुरा व देल्हुआ उपकेंद्रों से जुड़े गांवों में स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। ग्रामीणों को दिन-रात मिलाकर बमुश्किल 8 से 10 घंटे भी सुचारू बिजली नहीं मिल पा रही है। भीषण गर्मी और खेती-किसानी के मौसम में अघोषित बिजली कटौती ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।
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सभा में वक्ताओं ने तकनीकी खामियों और विभागीय पक्षपात को भी प्रमुखता से उठाया। नेता आदित्य योगी ने बताया कि इन क्षेत्रों की मुख्य सप्लाई रसड़ा से आती है, जिससे बलिया सिविल लाइन समेत कई बड़े फीडर जुड़े हैं। अत्यधिक लोड होने से दिनभर बार-बार ट्रिपिंग होती रहती है। जब भी ग्रामीण शिकायत दर्ज कराते हैं, तो अधिकारी मुख्य लाइन में खराबी का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लेते हैं। आरोप लगाया गया कि शहर को निर्बाध बिजली देने के लिए अक्सर ग्रामीण इलाकों की बत्ती गुल कर दी जाती है।
ग्रामीणों ने मांग किया कि सुखपुरा व देल्हुआ विद्युत उपकेंद्रों को शीघ्र इब्राहिमपट्टी पावर ट्रांसमिशन से संबद्ध किया जाए। बिना वास्तविक मीटर रीडिंग के मनमाने ढंग से भेजे जा रहे फर्जी व अत्यधिक बिलों को तत्काल दुरुस्त किया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में लटक रहे जर्जर व पुराने विद्युत तारों को तुरंत बदला जाए ताकि हादसों पर रोक लगे। विद्युत संबंधी शिकायतों का समयबद्ध, पारदर्शी और संतोषजनक निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।














