डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को गिफ्ट मिला नीला ड्रम, बोले- यह बहुत काम का है बस उल्टा मत सोचो

लखनऊ (Lucknow) के डॉ. राम मनोहर लोहिया पार्क में हास्य और व्यंग्य की धारा बही। राजनीति से लेकर सामाजिक मुद्दों तक, हर विषय पर चुटीले व्यंग्य प्रस्तुत किए गए। अवसर था हास्य दिवस पर आयोजित ‘लंतरानी हास्य उत्सव’ का, जहां कवियों की रचनाओं ने श्रोताओं को गुदगुदाने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर कर दिया।

विशिष्ट अतिथियों को अनूठे उपहार

कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक (Deputy CM Brajesh Pathak) को ‘नीला ड्रम’ भेंट किया गया, जिस पर उन्होंने पहले गंभीर टिप्पणी दी और फिर मजाकिया अंदाज में कहा, “यह बहुत काम का है, इसमें कई चीजें रखी जा सकती हैं। बस उल्टा मत सोचो!”महापौर सुषमा खर्कवाल को ‘हार्पिक’ भेंट किया गया, जिस पर उन्होंने हंसते हुए कहा, “सफाई अभियान में यह भी एक योगदान है।” वहीं, पूर्व मंत्री स्वाति सिंह को जब आईना भेंट किया गया, तो उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “नेता का काम आईना दिखाना होता है।” जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी पार्टी ने भी उन्हें आईना दिखाया है, तो उन्होंने मुस्कुराकर जवाब दिया, “हमारी पार्टी विपक्ष को आईना दिखाने का काम करती है।”

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कवियों की हास्य रचनाओं ने बांधा समां

राजस्थान से आए कवि पार्थ नवीन ने अपनी हास्य रचनाओं से खूब ठहाके बटोरते हुए कहा,”इंग्लिश वाले हैं, इंडियन की बात करते हैं, जमते तो हैं नहीं, मिलियन की बात करते हैं।”पुणे से आए दिलीप शर्मा ने चुटकी लेते हुए सुनाया,”कोई कबाड़ी वाला मिले तो बताना जरा, कई पुरानी रंजिशें बेचनी हैं मुझे।”बाराबंकी के कवि विकास बौखल ने मोहब्बत पर जोर देते हुए कहा,”सारी दुनिया को चलो प्यार से जोड़ा जाए… प्यार के रोग को आधार से जोड़ा जाए।”शिखा श्रीवास्तव की पंक्तियां भी खूब सराही गईं,”वंदना मेरे मन में मचलती रहे, गीत बन के यूं ही निकलती रहे।”

सम्मानों की बरसात

कार्यक्रम में अरुण जैमिनी को ‘लंतरानी सम्मान’ और मुकेश बहादुर सिंह को ‘जोरू का गुलाम’ सम्मान से नवाजा गया। हास्य कवि सर्वेश अस्थाना की हाजिरजवाबी और मंच संचालन को भी खूब सराहा गया।

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शादीशुदा ज्यादा खुश या कुंवारे?

कार्यक्रम के दौरान जब उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से पूछा गया कि शादीशुदा और कुंवारे में कौन ज्यादा खुश रहता है, तो उन्होंने जवाब दिया, “शादीशुदा।” इसके बाद पूछा गया, “अगर सड़क पर 500 और 100 का नोट गिरा हो, तो कौन पहले उठाएगा?” उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “पहले इधर-उधर देखूंगा, फिर उठाकर पूछूंगा यह किसका है!” लव मैरिज और अरेंज मैरिज पर भी उन्होंने कहा, “माता-पिता के पास लंबा अनुभव रहता है, उनकी राय जरूरी होती है।”

हास्य उत्सव की अनोखी यादें

इस हास्य उत्सव में उपहारों, चुटीले संवादों और कवियों की रचनाओं ने ऐसी रंगत भरी कि हर ओर ठहाकों की गूंज सुनाई दी। यह आयोजन न सिर्फ मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि व्यंग्य के जरिये समाज को सोचने का भी मौका दिया।

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