महोबा (उत्तर प्रदेश): महोबा जिले के चरखारी विधायक ब्रजभूषण राजपूत (उर्फ गुड्डू राजपूत) और जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के बीच हुए विवाद ने राजनीतिक हलचल मचा रखी है। इस मामले में बीजेपी द्वारा विधायक को जारी किए गए स्पष्टीकरण नोटिस के बाद, ब्रजभूषण के पिता और पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत ने बड़ा यू-टर्न लिया है। उन्होंने अपने बेटे के विवादित बयान पर माफी मांगते हुए कहा कि “व्यक्ति कभी कुछ बोलना चाहता है, लेकिन निकलता कुछ और है।”
विवाद की जड़
विवाद 30 जनवरी 2026 को शुरू हुआ, जब जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह महोबा में एक कार्यक्रम से लौट रहे थे। चरखारी विधायक ब्रजभूषण राजपूत ने करीब 100 ग्राम प्रधानों और समर्थकों के साथ मंत्री का काफिला रोक दिया। विधायक ने आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों की मरम्मत नहीं हुई, जिससे गांवों में पानी की किल्लत और बदहाली बनी हुई है। नारेबाजी, धक्का-मुक्की और तीखी बहस हुई। मंत्री ने विधायक को अपनी गाड़ी में बिठाकर डीएम कार्यालय ले जाकर चर्चा की, जहां जिलाधिकारी ने काम पूरा होने का दावा किया, लेकिन विधायक ने 20 दिनों में समाधान का अल्टीमेटम दिया।
इस घटना के बाद विधायक के एक वीडियो में विवादित बयान वायरल हुए, जिसमें उन्होंने कहा कि “किसी को बंधक बनाना मामूली बात है” और “अभी मंत्री को रोका, जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री को भी रोक लेंगे।” उन्होंने पुराने दिनों में अधिकारियों को “चूड़ियां-पेटीकोट” पहनाने का जिक्र भी किया।
बीजेपी का नोटिस और अनुशासन का सवाल
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने विधायक को स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया, जिसमें 7 दिनों के अंदर जवाब मांगा गया। पार्टी ने अनुशासनहीनता और सार्वजनिक रूप से पार्टी नेताओं पर बयान देने पर नाराजगी जताई। सूत्रों के अनुसार, राज्य संगठन महासचिव धर्मपाल सिंह ने भी विधायक को संयम बरतने की नसीहत दी।
गंगाचरण राजपूत का यू-टर्न और माफी
नोटिस के बाद पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत ने बेटे के बचाव में पहले फेसबुक पर पोस्ट किया था कि “मेरा बेटा निर्दोष है, महादेव उसे सद्बुद्धि दें।” लेकिन अब उन्होंने यू-टर्न लेते हुए कहा:
व्यक्ति कभी कुछ बोलना चाहता है, लेकिन निकलता कुछ और है। गलती हुई है।”
बुंदेली कहावत है — मूड (सिर) धर के पांव (पैर) पड़ेंगे। ब्रजभूषण ने गलती की, अब वह पांव पड़ेंगे।”
बीजेपी के संविधान में अनुशासनहीनता पर बड़े-बड़े नेताओं को त्यागपत्र देना पड़ा है। अपराध छोटा हो या बड़ा, सजा सबको होती है। मंत्री ने भी पार्टी संविधान तोड़ा है।”
ब्रजभूषण किसी दूसरी पार्टी में नहीं जाएगा। वह बीजेपी के लिए जीते हैं।”
गंगाचरण ने स्पष्ट किया कि पार्टी में कोई झगड़ा नहीं है, बल्कि यह जनता के मुद्दों पर हुआ। लेकिन पार्टी से कार्यवाही का डर साफ झलक रहा है, क्योंकि बेटे के बयान ने पार्टी को असहज कर दिया है।
राजनीतिक प्रभाव और भविष्य
यह घटना योगी सरकार में आंतरिक मतभेदों को उजागर करती है। ब्रजभूषण राजपूत (लोध समुदाय से) 2017 और 2022 में चरखारी से जीते हैं। उनके पिता गंगाचरण राजपूत तीन बार लोकसभा सांसद और एक बार राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। विधायक का स्टाइल “राजनीतिक थिएट्रिक्स” के लिए जाना जाता है।
INPUT-ANANYA MISHRA












































