उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य जोरों पर है। बरेली जिले के विभिन्न मूल्यांकन केंद्रों पर शिक्षक जब उत्तर पुस्तिकाएं देख रहे हैं तो सवालों के जवाबों के बजाय कई छात्रों ने अपनी कॉपियों में अपनी पारिवारिक मजबूरियां, आर्थिक तंगी, बीमारी और धार्मिक आस्था लिखकर परीक्षकों से गुहार लगाई है।
सबसे भावुक अपील
एक इंटरमीडिएट छात्र ने अपनी उत्तर पुस्तिका में लिखा,’ गुरु जी, मुझे पास कर दो प्लीज। मेरे माता-पिता अक्सर बीमार रहते हैं। सुबह-शाम उनकी सेवा करना, दवा देना, खाना बनाना और घर के सारे काम मेरे ऊपर ही हैं। पढ़ाई के लिए समय ही नहीं मिल पाता। अगर मैं फेल हो गया तो मेरे बीमार माता-पिता को बहुत गहरा सदमा लगेगा। इसलिए आप मुझे पास कर दीजिए।
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अन्य अजीबोगरीब अपीलें
- एक छात्र ने लिखा, सर, मैंने पूरे साल मेहनत की, लेकिन परीक्षा से पहले मेरी मां की तबीयत बहुत खराब हो गई। मैं अस्पताल में ही रह गया। प्लीज पास कर दो।
- किसी अन्य छात्र ने लिखा की, गुरु जी, भगवान राम मेरे गवाह हैं कि मैंने पढ़ाई की थी, लेकिन याद नहीं आ रहा। आप मुझे पास कर दो, मैं अगले साल अच्छे नंबर लाऊंगा।
- एक छात्रा ने लिखा सर, घर में मेरी शादी की बात चल रही है। अगर मैं फेल हो गई तो शादी टूट जाएगी। प्लीज पास कर दीजिए।
- कुछ छात्रों ने तो भगवान, हनुमान जी और गौरी शंकर से मदद मांगते हुए लिखा है कि, भगवान आपकी परीक्षा में अच्छे नंबर दें, आप मुझे पास कर दो।
शिक्षकों की प्रतिक्रिया
मूल्यांकन कार्य में लगे शिक्षकों ने बताया कि हर साल कुछ-न-कुछ ऐसी अपीलें आती हैं, लेकिन इस बार बरेली में संख्या काफी ज्यादा है। एक शिक्षक ने कहा, कॉपी देखते समय कभी हंसी आ जाती है, तो कभी दिल भारी हो जाता है। कई बच्चे वाकई बहुत मजबूरी में हैं, लेकिन हम तो सिर्फ मूल्यांकनकर्ता हैं, पास-फेल का फैसला नियमों के अनुसार ही करना पड़ता है। यूपी बोर्ड के नियमों के अनुसार परीक्षक केवल लिखे गए उत्तरों के आधार पर ही अंक देते हैं। भावुक अपीलों या गुहार का कोई असर मूल्यांकन पर नहीं पड़ता।
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मूल्यांकन कार्य कब तक चलेगा?
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटर की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन 31 मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बरेली सहित पूरे प्रदेश में 1.50 लाख से अधिक शिक्षक इस कार्य में लगे हुए हैं। ऐसी भावुक अपीलें हर साल बोर्ड परीक्षाओं के दौरान चर्चा में आती हैं और छात्रों की वास्तविक परेशानियों को उजागर करती हैं।










































