इटावा: गांवों को स्वच्छ और कचरा मुक्त रखने के लिए सरकारी योजनाओं के तहत बनाए गए रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बढ़पुरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत जरहौली में करीब डेढ़ साल पहले तैयार किया गया आरआरसी सेंटर अब भी बंद पड़ा है। निर्माण और जरूरी संसाधनों पर सरकारी धन खर्च होने के बावजूद इसका नियमित संचालन शुरू नहीं हो सका है। इससे योजना के क्रियान्वयन और सरकारी धन के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
ताले में बंद मिला आरआरसी सेंटर
सोमवार को मौके पर पड़ताल के दौरान जरहौली स्थित आरआरसी सेंटर बंद मिला। सेंटर के मुख्य द्वार पर ताला लगा था, जबकि परिसर के अंदर कचरा संग्रहण के लिए खरीदा गया ई-रिक्शा खड़ा दिखाई दिया। इसके अलावा परिसर में एक कुर्सी समेत कुछ सामान मौजूद था। मौके की स्थिति से साफ नजर आया कि केंद्र तैयार होने के बावजूद उसका उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुसार नहीं हो रहा है।
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कूड़ा उठाने की व्यवस्था भी बेपटरी
ग्रामीणों के अनुसार, घर-घर से कचरा एकत्र करने के लिए ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई थी, लेकिन नियमित रूप से कूड़ा उठाने के लिए वाहन गांव में नहीं पहुंचता। इसके चलते घरों और सार्वजनिक स्थानों से निकलने वाले कचरे के निस्तारण की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरआरसी सेंटर का संचालन शुरू हो जाए तो गांव की सफाई व्यवस्था में काफी सुधार किया जा सकता है।
डेढ़ साल से बंद, निगरानी पर उठे सवाल
आरआरसी सेंटर लंबे समय से बंद रहने के कारण इसकी निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों के बीच यह चर्चा है कि जब केंद्र का संचालन नियमित रूप से नहीं होना था तो ई-रिक्शा और अन्य संसाधनों की खरीद क्यों की गई। साथ ही, सेंटर को चालू रखने और कचरा संग्रहण के लिए क्या कोई प्रभावी कार्ययोजना बनाई गई थी, यह भी जांच का विषय है।
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जिम्मेदारों ने जांच का दिया भरोसा
ग्राम पंचायत सचिव रूपेंद्र कुमार ने आरआरसी सेंटर के बंद होने की पुष्टि की है। वहीं, एडीओ पंचायत अशोक कुमार ने मामले की जांच कराने और जल्द ही सेंटर का संचालन शुरू कराने का आश्वासन दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच के बाद जिम्मेदारी तय होती है या मामला केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित रह जाता है।
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