वाराणसी: महात्मा गांधी की 157वीं जयंती पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में भी बापू से जुड़ी कई ऐतिहासिक यादें आज तक सुरक्षित हैं। विश्वविद्यालय के मानविकी संकाय के प्रथम तल पर स्थित ‘बापू कक्ष’ में गांधीजी की दुर्लभ तस्वीरें, पत्र और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं। हालांकि, इस ऐतिहासिक कक्ष को संग्रहालय के रूप में विकसित करने की योजना अभी तक पूरी नहीं हो पाई है।
1934 में करीब एक सप्ताह विद्यापीठ में रहे थे गांधीजी
इतिहासकारों के मुताबिक, महात्मा गांधी वर्ष 1934 में 26 जुलाई से 2 अगस्त तक काशी में आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यकारिणी समिति और केंद्रीय हरिजन सेवक संघ के अधिवेशन में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने करीब एक सप्ताह काशी विद्यापीठ में बिताया था। गांधीजी की इसी यात्रा की याद में विश्वविद्यालय में एक कक्ष को ‘बापू कक्ष’ का नाम दिया गया है, जो पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के पास स्थित है।
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नियमित नहीं खुलता बापू कक्ष, विद्यार्थियों को नहीं मिल पाता मौका
विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के अनुसार, ‘बापू कक्ष’ आम दिनों में बंद ही रहता है। गांधी जयंती के मद्देनजर एक अक्टूबर को साफ-सफाई के लिए इसे खोला जाता है, लेकिन इसके बाद दोबारा बंद कर दिया जाता है। ऐसे में छात्र-छात्राओं और शोधार्थियों को गांधीजी से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरों को करीब से देखने और उनके बारे में जानकारी हासिल करने का अवसर नहीं मिल पाता।
दुर्लभ तस्वीरों और पत्रों में दर्ज है इतिहास
कक्ष में महात्मा गांधी से जुड़ी कई महत्वपूर्ण स्मृतियां संरक्षित हैं। यहां भारत माता मंदिर के निर्माण से जुड़े कारीगरों से गांधीजी की बातचीत की दुर्लभ तस्वीर मौजूद है। इसके अलावा डॉ. संपूर्णानंद द्वारा गांधीजी को लिखा पत्र, आचार्य नरेंद्र देव छात्रावास के उद्घाटन की तस्वीर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और आचार्य बीरबल सिंह की तस्वीरें भी यहां सुरक्षित हैं। 25 अक्टूबर 1936 को भारत माता मंदिर के उद्घाटन से संबंधित तस्वीर भी बापू कक्ष की ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है।
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म्यूजियम के रूप में विकसित करने की तैयारी, मंत्रालय को भेजे गए पत्र
काशी विद्यापीठ के कुलपति एके त्यागी ने बताया कि ‘बापू कक्ष’ को आधुनिक संग्रहालय का स्वरूप देने के लिए दोबारा प्रयास किए जा रहे हैं। इस संबंध में संस्कृति मंत्रालय समेत अन्य संबंधित संस्थानों को पत्र भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि कक्ष को बेहतर तरीके से विकसित करने की दिशा में नए सिरे से पहल की जाएगी। फिलहाल बापू कक्ष में रामधुन बजाई जाती है, लेकिन इसे स्थायी संग्रहालय के रूप में विकसित करने की योजना अभी साकार होना बाकी है।









