लोकसभा में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने से जुड़े संशोधन विधेयक पेश होने के बाद संसद में तीखी बहस देखने को मिली। प्रस्तावित प्रावधानों के मुताबिक, अगर ये विधेयक पास हो जाते हैं तो 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित हो जाएंगी। इस बड़े बदलाव को लेकर विभिन्न दलों के नेताओं ने अपने-अपने दृष्टिकोण सामने रखे।
ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग प्रावधान की मांग
समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने बहस के दौरान ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की मांग उठाई। उन्होंने सवाल किया कि जब महिला आरक्षण की बात हो रही है तो इसमें सामाजिक न्याय के अन्य पहलुओं को क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने यह भी पूछा कि मुस्लिम महिलाओं को इस व्यवस्था में अलग पहचान क्यों नहीं दी जा रही।
सरकार का जवाब
इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता। उन्होंने कहा कि सरकार इस तरह के किसी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगी क्योंकि यह संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ होगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर समाजवादी पार्टी चाहे तो अपने स्तर पर टिकट वितरण में मुस्लिम महिलाओं को प्राथमिकता दे सकती है।
जनगणना और जातीय आंकड़ों पर भी उठे सवाल
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि नई जनगणना प्रक्रिया में जाति से संबंधित कोई कॉलम शामिल नहीं किया गया है। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित शाह ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सोच ऐसी है कि अगर उन्हें मौका मिले तो वे घरों की भी जाति तय कर दें। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सिर्फ मकानों की गिनती का काम चल रहा है, इसलिए उसमें जाति का कॉलम होना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जब वास्तविक जनगणना, यानी लोगों की गिनती होगी, तब जाति से जुड़ा कॉलम भी शामिल किया जाएगा। वहीं, सपा के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं को लेकर विधेयक में चुप्पी पर सवाल उठाए। सरकार की ओर से जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि जब जनगणना पूरी होगी, तब जाति से जुड़े सभी पहलुओं को उचित रूप से शामिल किया जाएगा।
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