UP: बलिया स्थित जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय में बुधवार को आठवां दीक्षांत समारोह भव्य तरीके से आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय परिसर के दीक्षांत मंडप में हुए इस कार्यक्रम की अध्यक्षता उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती रजनी तिवारी ने की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास करना है। शिक्षा से संवेदनशीलता, नैतिकता, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।
छात्रों को रोजगार पाने के साथ रोजगार देने वाला बनने की अपील
उच्च शिक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारतीय शिक्षा दर्शन की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपनी सोच को सिर्फ नौकरी हासिल करने तक सीमित न रखें, बल्कि उद्यमी बनकर रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल करने वाली छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि आज बेटियां शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, रक्षा, चिकित्सा और अन्य क्षेत्रों में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं।
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कृषि और तकनीक के क्षेत्र में युवाओं की भूमिका अहम: पद्मश्री डॉ. अशोक सिंह
समारोह के मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. अशोक कुमार सिंह, पूर्व निदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली ने विद्यार्थियों को दीक्षोपदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का दौर है और किसी भी देश की ताकत उसके शिक्षित, कुशल और नवाचार करने वाले युवाओं में छिपी होती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे एआई, ड्रोन, जैव प्रौद्योगिकी और डिजिटल कृषि जैसी तकनीकों के माध्यम से देश के कृषि क्षेत्र को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दें।
राज्यपाल के संदेश में युवाओं को मेहनत और लक्ष्य पर ध्यान देने की सीख
विशिष्ट अतिथि कुलाधिपति एवं राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी डॉ. पंकज एल. जानी ने राज्यपाल के संदेश का वाचन किया। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों और स्वर्ण पदक विजेताओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है और युवाओं को अपनी संस्कृति व जड़ों से जुड़े रहते हुए विकास की यात्रा में योगदान देना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को लक्ष्य तय कर कड़ी मेहनत के साथ उसे हासिल करने के लिए प्रेरित किया।
नंदिनी वर्मा को मिला कुलाधिपति स्वर्ण पदक, 35 छात्राओं ने रचा इतिहास
दीक्षांत समारोह में विभिन्न पाठ्यक्रमों में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले 44 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। एमएससी रसायन विज्ञान की छात्रा नंदिनी वर्मा को पूरे विश्वविद्यालय में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने पर कुलाधिपति स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। वहीं प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की छात्रा विनीता सिंह को डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल स्मृति स्वर्ण पदक मिला। इस बार स्वर्ण पदक पाने वालों में 35 छात्राएं और 9 छात्र शामिल रहे। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. नरेंद्र कुमार शुक्ल ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी।
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स्मारिका व पुस्तकों का विमोचन, बच्चों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बांटी गई किट
समारोह के दौरान विश्वविद्यालय की स्मारिका ‘सृजन’, त्रैमासिक समाचार पत्रिका ‘अन्वीक्षण (द क्वेस्ट)’ और चार पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इसके अलावा प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को शैक्षणिक किट वितरित किए गए, जिनमें स्कूल बैग, कॉपी, किताबें, स्टेशनरी और अन्य सामग्री शामिल थी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी 200 किट प्रदान की गईं। कार्यक्रम में जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह और पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, प्राचार्य, प्रबंधक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।
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