रायबरेली: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर शहर के रतापुर सामुदायिक केंद्र में भावपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वर्ष 1947 में देश के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले गुमनाम शहीदों और विस्थापन की पीड़ा झेलने वाले लाखों लोगों को याद किया गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने देश की एकता, अखंडता और भाईचारे को मजबूत बनाए रखने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री दिनेश सिंह ने कहा कि देश के विभाजन का दर्द कभी भुलाया नहीं जा सकता। वर्ष 1947 में देश को आजादी तो मिली, लेकिन विभाजन की त्रासदी ने करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित किया। लाखों लोगों को अपना घर, जमीन और कारोबार छोड़कर अनजान जगहों पर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवाई और परिवार बिछड़ गए।
उन्होंने कहा कि विभाजन केवल भारत की सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि इसने समाज और लोगों के दिलों को भी बांट दिया। विभाजन की पीड़ा से गुजरे परिवारों की स्मृतियां आज भी इतिहास का हिस्सा हैं। ऐसे में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उद्देश्य उन पीड़ितों और गुमनाम शहीदों के बलिदान को याद करना है, जिनकी कुर्बानी को देश कभी भुला नहीं सकता।
राज्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नई पीढ़ी को देश के स्वतंत्रता संग्राम और 1947 के विभाजन की सच्चाई से परिचित कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इतिहास को याद करने का उद्देश्य किसी के प्रति कटुता पैदा करना नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा पैदा न होने देना है। देश की एकता और अखंडता को मजबूत करना ही उन बलिदानों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आजादी के लिए असंख्य लोगों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जिन लोगों ने संघर्ष किया और विभाजन के समय जिन परिवारों ने अपनों को खोया, उनके योगदान और पीड़ा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। इतिहास के इन अध्यायों को याद कर युवा पीढ़ी राष्ट्र की एकता, सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे के महत्व को समझ सकती है।
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