चंदौली: गुरुवार को कैलाशपुरी स्थित एक बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर संचालित कथित अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के कॉल सेंटर का पुलिस ने पर्दाफाश किया। स्वाट, सर्विलांस, साइबर टीम और मुगलसराय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि तीन अन्य को नामजद किया गया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह जापान के नागरिकों को तकनीकी सहायता के नाम पर झांसा देकर उनके कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस हासिल करता था। इसके बाद बैंकिंग संबंधी जानकारी लेकर कथित तौर पर रकम की ठगी की जाती थी।
पुलिस को सूचना मिली थी कि स्वागत इलेक्ट्रॉनिक शोरूम और आदित्य विजन के बगल स्थित बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर संदिग्ध साइबर कॉल सेंटर संचालित हो रहा है। टीम ने वीडियोग्राफी करते हुए मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। जांच के दौरान कंप्यूटर स्क्रीन पर विदेशी भाषा में लाइव कॉल चलती मिली। इसके बाद पुलिस ने मौके से पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
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पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में रौनक सिंह निवासी नालंदा, रोशन कुमार व अमन कुमार निवासी गया, अंकित कुमार निवासी नवादा और विकास वैभव निवासी गया शामिल हैं। रौनक सिंह को कॉल सेंटर का मैनेजर बताया गया है। एक आरोपी के दो बैंक खातों में करीब नौ लाख रुपये फ्रीज कराए गए हैं। पुलिस मुख्य संचालक और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।
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जापानी भाषा सीखकर करते थे साइबर ठगी
पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने नालंदा और गया में जापानी भाषा सीखी थी। इसके बाद VoIP कॉलिंग के जरिए जापान में फोन कर खुद को कंप्यूटर या बैंक का तकनीकी सहायता कर्मचारी बताया जाता था। पीड़ितों को कथित सपोर्ट वेबसाइट पर जाने और छह अंकों का पिन डालने के लिए कहा जाता था। पिन डालते ही रिमोट एक्सेस के जरिए कंप्यूटर पर नियंत्रण हासिल कर लिया जाता था।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के निशाने पर तकनीक की कम जानकारी रखने वाले बुजुर्ग जापानी नागरिक रहते थे। रिमोट एक्सेस के दौरान पीड़ितों से इंटरनेट बैंकिंग या बैंकिंग ऐप में लॉग-इन कराया जाता था। इसके बाद बैंकिंग संबंधी जानकारी व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचाई जाती थी। पुलिस को आशंका है कि ठगी की रकम अलग-अलग म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती थी ।














