UP: उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। चुनाव आयोग द्वारा जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। यह संख्या राज्य के कुल मतदाताओं का लगभग 18.7 प्रतिशत बताई जा रही है।
भारी कटौती से बढ़ी सत्ताधारी पार्टी की बेचैनी
इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने से सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की चिंता बढ़ गई है। हालात को संभालने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के साथ एक अहम वर्चुअल बैठक की। बैठक में पार्टी संगठन को मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
चुनाव आयोग ने बताए नाम हटाने के कारण
चुनाव आयोग के अनुसार, मतदाता सूची से नाम हटाने के पीछे कई कारण हैं। इनमें मतदाताओं की मृत्यु, स्थायी या अस्थायी पलायन, लंबे समय से अनुपस्थिति और एक से अधिक जगहों पर नाम दर्ज होना शामिल है। संशोधन के बाद यूपी की ड्राफ्ट मतदाता सूची में अब 12.55 करोड़ मतदाता शेष रह गए हैं।
हर बूथ पर 200 नए वोटर जोड़ने का लक्ष्य
राज्य में हालिया परिसीमन और पुनर्गठन के बाद कुल 1.77 लाख पोलिंग बूथ हैं। भाजपा ने लक्ष्य तय किया है कि प्रत्येक बूथ पर कम से कम 200 नए मतदाताओं के नाम जुड़वाए जाएं। इस तरह पार्टी करीब 3.5 करोड़ नए और वास्तविक वोटर्स को मतदाता सूची में शामिल कराने की रणनीति पर काम कर रही है।
प्रवासी यूपीवासियों पर विशेष नजर
बीजेपी की योजना में दूसरे राज्यों में रह रहे उत्तर प्रदेश के मूल निवासियों पर खास फोकस किया गया है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, दिल्ली जैसे राज्यों में काम कर रहे यूपी के लोगों से अपील की जाएगी कि वे अपना वोट यूपी में ट्रांसफर कराएं। चूंकि दिल्ली में फिलहाल विधानसभा चुनाव नहीं हैं, ऐसे में वे 2027 के यूपी चुनावों के लिए पंजीकरण करा सकते हैं।
युवाओं और कटे हुए वोटर्स को साधने की कोशिश
इसके अलावा, पहली बार वोट देने वाले युवाओं और दस्तावेजी त्रुटियों के कारण सूची से हटाए गए मतदाताओं को भी पार्टी दोबारा जोड़ने की कोशिश कर रही है। सूत्रों के अनुसार, SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर आशंकाओं के चलते कई मतदाताओं ने शहरों की बजाय अपने गांव के पते पर वोट बनाए रखे हैं, जिससे मतदान के दिन उनके वोट डालने की संभावना कम हो जाती है।
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आसान मतदान वाले क्षेत्र में नाम रखने की अपील
पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे मतदाताओं से आग्रह करें कि वे उसी विधानसभा और लोकसभा क्षेत्र में अपना नाम दर्ज कराएं, जहां वे आसानी से मतदान कर सकें। इससे मतदान प्रतिशत बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
6 फरवरी तक दर्ज होंगी आपत्तियां और दावे
चुनाव आयोग ने बताया है कि मतदाता सूची से जुड़े दावे और आपत्तियां 6 जनवरी से 6 फरवरी तक स्वीकार की जाएंगी। इसके बाद 6 मार्च को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
‘विकसित भारत’ अभियान के तहत जमीनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी
भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं को ‘विकसित भारत’ अभियान के अंतर्गत ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून और सरकारी योजनाओं के लाभों के बारे में लोगों को जागरूक करने का भी निर्देश दिया है, ताकि चुनाव से पहले संगठन की जमीनी पकड़ और मजबूत की जा सके।














































