नोएडा के सेक्टर-150 में हुई एक दर्दनाक मौत अब सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं रह गई है। यह मामला धीरे-धीरे ‘सिस्टम द्वारा की गई हत्या’ की तस्वीर पेश करने लगा है। गुरुग्राम में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करने वाले युवराज मेहता की मौत ने नोएडा अथॉरिटी, बिल्डरों और प्रशासनिक तंत्र की वर्षों पुरानी लापरवाही को बेनकाब कर दिया है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि युवराज की मौत कैसे हुई, बल्कि यह है कि क्या इस मौत को रोका जा सकता था? और अगर हां, तो जिम्मेदार कौन है?
शुक्रवार, 16 जनवरी की रात। घना कोहरा, सड़कों पर Low visibility और घर लौटने की जल्दी। गुरुग्राम से लौट रहे युवराज मेहता अपनी कार से नोएडा के सेक्टर-150 से गुजर रहे थे। इसी दौरान उनकी कार नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र में स्थित एक निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में जा गिरी। बेसमेंट में पानी भरा हुआ था। न कोई बैरिकेडिंग, न चेतावनी बोर्ड, न ही कोई सुरक्षा इंतजाम। अंधेरे और कोहरे में युवराज को अंदाजा तक नहीं हुआ कि सामने मौत खड़ी है। पानी से भरे बेसमेंट में डूबकर उनकी दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा नहीं, बल्कि एक ऐसी त्रासदी थी, जिसकी नींव सालों पहले रख दी गई थी।
युवराज की मौत के बाद सोशल मीडिया पर एक ऐसा पत्र वायरल हुआ, जिसने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी। यह पत्र उसी बिल्डर कंपनी,अर्थम बिल्डर (विजटाउन प्लानर प्राइवेट लिमिटेड, WWPL) का है, जिसके निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में युवराज की जान गई। 4 मार्च 2022 को लिखे गए इस पत्र में बिल्डर कंपनी ने नोएडा अथॉरिटी को साफ-साफ चेतावनी दी थी कि साइट पर हालात बेहद खतरनाक हैं। यह पत्र नोएडा अथॉरिटी के सीईओ, प्लानिंग विभाग, जीएम वर्क्स डिपार्टमेंट, नॉलेज पार्क थाना प्रभारी और सेक्टर-108 के सर्किल ऑफिसर को भेजा गया था।
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पत्र में बताया गया था कि नोएडा अथॉरिटी की मुख्य सीवर और ड्रेन लाइन 2–3 जगहों से धंस चुकी है, जिसकी वजह से प्लॉट संख्या SC-02, A-3 के बेसमेंट में लगातार नाले और सीवर का पानी भर रहा है। यही वही प्लॉट है, जहां युवराज की मौत हुई। पत्र में साफ शब्दों में लिखा गया था कि अगर टूटी हुई सीवर और ड्रेन लाइनों की तुरंत मरम्मत नहीं की गई और बेसमेंट से पानी नहीं निकाला गया, तो किसी भी समय गंभीर हादसा हो सकता है। इतना ही नहीं, भारी मिट्टी और पानी के दबाव से सड़क धंसने की बात भी कही गई थी, जिससे बैरिकेडिंग कई जगह गिर चुकी थी। बिल्डर ने साइट और बेसमेंट की तस्वीरें भी अधिकारियों को भेजी थीं। तीन साल पहले दी गई इस चेतावनी को अगर गंभीरता से लिया गया होता, तो शायद आज युवराज जिंदा होते।
युवराज की मौत से जुड़े इस मामले में एक और अहम दस्तावेज सामने आया है। यह पत्र 9 अक्टूबर 2023 को सिंचाई निर्माण खंड, गाजियाबाद के अधिशासी अभियंता द्वारा लिखा गया था। यह नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के वर्क सर्किल-10 के वरिष्ठ प्रबंधक को भेजा गया था। इस पत्र में सेक्टर-150 के बरसाती पानी को हिंडन नदी तक पहुंचाने के लिए बनाए जाने वाले हेड रेगुलेटर के निर्माण से जुड़ी गंभीर खामियों का जिक्र है। पत्र में बताया गया कि इस काम को लेकर पहले भी कई बार पत्राचार हो चुका है। 4 अक्टूबर 2023 को नोएडा अथॉरिटी और सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने मिलकर साइट का निरीक्षण किया था।
निरीक्षण में यह सामने आया कि सेक्टर-150 से निकलने वाले बरसाती पानी को हिंडन नदी में छोड़ने के लिए जो डिजाइन पहले तैयार किया गया था, वह अब पूरी तरह गलत साबित हो चुका है। इसलिए नए सिरे से डिजाइन बनाने की जरूरत बताई गई। अधिकारियों ने यह भी सुझाव दिया कि रेगुलेटर में ऐसे गेट लगाए जाएं, जिससे पानी के बहाव को नियंत्रित किया जा सके। चौंकाने वाली बात यह है कि पहले ही इस प्रोजेक्ट पर करीब 13.50 लाख रुपये खर्च हो चुके थे, लेकिन अब नए डिजाइन और सर्वे के लिए लगभग 30 लाख रुपये और खर्च करने की बात कही गई। पत्र के अंत में साफ लिखा गया कि इन सुधारों का मकसद यही है कि सेक्टर-150 में बरसात के समय जलभराव न हो और पानी आसानी से हिंडन नदी तक पहुंच सके। यानी प्रशासन को यह पूरी जानकारी थी कि सेक्टर-150 जलभराव के लिहाज से एक “डेंजर जोन” है।
युवराज मेहता के पिता राजकुमार मेहता की शिकायत पर बिल्डर अभय कुमार सिंह समेत एक अन्य बिल्डर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। मुख्य आरोपी अभय कुमार सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में नोएडा अथॉरिटी के एक जूनियर इंजीनियर को निलंबित कर दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए और तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया।
इस SIT का नेतृत्व मेरठ जोन के एडीजी भानु भास्कर कर रहे हैं। टीम में मेरठ मंडल के कमिश्नर और लोक निर्माण विभाग (PWD) के चीफ इंजीनियर भी शामिल हैं। SIT को पांच दिनों के भीतर जांच पूरी कर मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपनी है। इतना ही नहीं, राज्य सरकार ने नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एम. लोकेश को भी पद से हटा दिया है। अब जब ये दोनों पत्र सामने आ चुके हैं, तो सवालों की बाढ़ आ गई है। तीन साल पहले चेतावनी मिलने के बावजूद नोएडा अथॉरिटी ने कार्रवाई क्यों नहीं की? जलभराव की समस्या जानते हुए भी सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए? निर्माणाधीन साइट पर न बैरिकेडिंग थी, न चेतावनी बोर्ड—यह किसकी जिम्मेदारी थी?
युवराज की मौत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कागजों में चलने वाला सिस्टम जब जमीनी हकीकत से कट जाता है, तो उसकी कीमत आम आदमी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। युवराज मेहता का मामला सिर्फ एक परिवार के उजड़ने का मामला नहीं है। यह उस सिस्टम की कहानी है, जहां फाइलें घूमती रहती हैं, पत्र लिखे जाते हैं, निरीक्षण होते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होती। और जब कार्रवाई होती है, तो किसी की जान जा चुकी होती है। अब देखना यह है कि SIT की रिपोर्ट सिर्फ दोषियों के नाम गिनाएगी या सच में सिस्टम की जवाबदेही तय होगी। युवराज तो वापस नहीं आ सकते, लेकिन अगर यह मामला बदलाव की शुरुआत बन सके, तो शायद उनकी मौत व्यर्थ नहीं जाएगी।












































