UP: जौहर-ट्रस्ट से आजम खान, अब्दुल्ला और तंजीन फातिमा का इस्तीफा, बहन और बड़े बेटे को सौंपी कमान

UP: समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद आजम खां (Azam Khan) ने अपने ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट (Maulana Ali Jauhar Trust) के सभी आधिकारिक पदों से इस्तीफा दे दिया है। गुरुवार 22 जनवरी 2026 को आजम खां (Azam Khan) के साथ उनकी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा (Tajin Fatima) और बेटे अब्दुल्ला आजम (Abdullah Azam) ने भी ट्रस्ट से अलग होने का फैसला लिया। परिवार के इस सामूहिक इस्तीफे के बाद ट्रस्ट की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है, जिसमें आजम खां की बहन निकहत अफलाक को अध्यक्ष और बड़े बेटे मोहम्मद अदीब को सचिव बनाया गया है।

कानूनी शिकंजे के बीच लिया गया फैसला

ट्रस्ट पर जमीन कब्जे, लैंड लीज नियमों के उल्लंघन और अन्य 30 से अधिक मुकदमों का दबाव बढ़ रहा था। पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट को दी गई कई जमीनों की लीज रद्द की, जिसमें जौहर यूनिवर्सिटी और रामपुर पब्लिक स्कूल शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में लीज रद्द करने के फैसले को सही ठहराया और इसे ‘पद का दुरुपयोग’ करार दिया। इन कानूनी चुनौतियों के बीच आजम खां परिवार ने ट्रस्ट से दूरी बनाने का फैसला किया ताकि संस्थान पर चल रहे विवादों का असर कम हो सके।

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ट्रस्ट क्या संचालित करती है?

मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट रामपुर में मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और रामपुर पब्लिक स्कूलों का संचालन करती है। यह ट्रस्ट 1995 में पंजीकृत हुआ था और आजम खां इसका प्रमुख चेहरा रहे हैं। यूनिवर्सिटी को लेकर जमीन अधिग्रहण, लैंड यूज और दान के मामलों में विवाद रहा है, जिसमें बीजेपी नेता आकाश सक्सेना की शिकायतों पर जांच हुई। कई मामलों में ट्रस्ट को झटके लगे, जैसे लीज निरस्त होना और इंस्टीट्यूट का सरकारी कब्जा।

नई कार्यकारिणी और परिवार की भूमिका

इस्तीफे के बाद ट्रस्ट की कमान आजम खां के परिवार के अन्य सदस्यों के हाथ में आ गई है:

  • अध्यक्ष: निकहत अफलाक (आजम खां की बहन)
  • सचिव: मोहम्मद अदीब (आजम खां का बड़ा बेटा)

यह बदलाव ट्रस्ट को कानूनी और प्रशासनिक रूप से मजबूत बनाने की कोशिश मानी जा रही है, जबकि आजम खां और उनके करीबी सदस्य अब सीधे तौर पर शामिल नहीं रहेंगे।

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आजम खां की मौजूदा स्थिति

आजम खां कई आपराधिक मामलों में आरोपी रहे हैं, जिनमें से कुछ में सजा भी हो चुकी है। जौहर ट्रस्ट से जुड़े विवादों के अलावा अन्य राजनीतिक और आपराधिक केसों में भी वे फंसे हुए हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में कुछ मामलों में जमानत मिली है। यह इस्तीफा उनके राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है, जहां वे अब ट्रस्ट के दैनिक संचालन से दूर रहेंगे।

ट्रस्ट विवाद का संक्षिप्त इतिहास

  • 2006: जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना।
  • 2017 के बाद: योगी सरकार में जांच शुरू, लैंड ग्रैब के आरोप।
  • 2023-2024: लीज रद्द, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं खारिज।
  • 2026: परिवार का सामूहिक इस्तीफा और नई टीम का गठन।

यह कदम ट्रस्ट को बचाने और विवादों से अलग रखने की रणनीति लगती है, लेकिन पीड़ित पक्ष और विपक्षी नेता इसे ‘दबाव में पीछे हटना’ बता रहे हैं। ट्रस्ट अब नए नेतृत्व के साथ आगे बढ़ेगा, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

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