दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की प्रेरणादायी सोच से अनुप्रेरित तथा माननीय कुलपति प्रो. पूनम टंडन के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर ‘महिला अध्ययन केंद्र तथा पिडिलाइट हॉबी आइडियाज़ के संयुक्त तत्वावधान में “प्रतीक्षा आश्रय गृह’ में दिनांक 24 जनवरी 2026 को सप्तदिवसीय हस्तशिल्प प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। माननीय राज्यपाल का निरंतर बल बालिका शिक्षा, सुरक्षा एवं सशक्तिकरण पर रहा है। इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए विश्वविद्यालय द्वारा समाज के वंचित एवं संवेदनशील वर्ग की बालिकाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है।
इस अवसर पर माननीय कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि “POCSO के अंतर्गत चिन्हित बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाना विश्वविद्यालय की सामाजिक जिम्मेदारी है। इस प्रकार के कौशल आधारित एवं संवेदनशील प्रशिक्षण कार्यक्रम बालिकाओं को न केवल आजीविका के साधन उपलब्ध कराते हैं, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से सम्मानजनक रूप से जोड़ने में भी सहायक होते हैं। विश्वविद्यालय बालिका सुरक्षा, शिक्षा एवं सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।”
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 24 जनवरी से 30 जनवरी 2026 तक संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम का आयोजन “सशक्त बालिका–उज्ज्वल भविष्य” की थीम पर किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य बालिकाओं के समग्र विकास, आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास एवं सामाजिक पुनर्वास को सुदृढ़ करना है। प्रशिक्षण के माध्यम से बालिकाओं को हस्तशिल्प से संबंधित व्यावहारिक, रचनात्मक एवं आजीविका उन्मुख कौशल प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे वे भविष्य में स्वरोज़गार एवं सम्मानजनक आजीविका के अवसर प्राप्त कर सकें।
कार्यक्रम का संचालन महिला अध्ययन केंद्रकी निदेशक प्रो दिव्या रानी सिंह के निर्देशन से किया जा रहा है, जिसमें बालिका सशक्तिकरण, कौशल विकास एवं सामाजिक समावेशन पर विशेष बल दिया जा रहा है। उनका प्रयास बालिकाओं को शिक्षा के साथ-साथ जीवनोपयोगी एवं व्यावसायिक कौशल से सशक्त करना आज की सामाजिक आवश्यकता है, जिससे उनमें आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता एवं स्वावलंबन की भावना विकसित हो सके।
सप्तदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत बालिकाओं को जूट बैग पर स्टेंसिल पेंटिंग, लिप्पन आर्ट, टेराकोटा पेंटिंग तथा टाई एंड डाई जैसी विविध रचनात्मक गतिविधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इन गतिविधियों के माध्यम से बालिकाओं को रंग संयोजन, डिज़ाइन विकास, हस्तनिर्मित उत्पाद निर्माण एवं बाज़ारोन्मुख कौशल से परिचित कराया जा रहा है, जिससे वे भविष्य में आय सृजन की दिशा में आगे बढ़ सकें। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम Pidilite Industries Limited (Hobby Ideas) की तकनीकी विशेषज्ञ श्रीमती कीर्ति अग्रवाल के निर्देशन में संचालित किया जा रहा है।प्रशिक्षण के उपरांत मूल्यांकन होगा और सभी कुशल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा ।
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प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर डॉ. सुमन शुक्ला, काउंसलर श्रीमती सीमा सिंह तथा गृह विज्ञान विभाग के शोधार्थी एवं अनुसंधानरत छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहीं। उल्लेखनीय है कि ‘प्रतीक्षा आश्रय गृह’ का संचालन फादर जोबी (सी.एस.टी.) के निर्देशन में तथा श्रीमती अर्पथा के प्रभार में किया जा रहा है। शोधार्थियों द्वारा बालिकाओं के साथ संवाद स्थापित कर उनके शैक्षणिक, सामाजिक एवं भावनात्मक विकास से जुड़े पहलुओं को समझने का प्रयास भी किया गया।
प्रशिक्षण में सहभागी बालिकाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस प्रकार के हस्तशिल्प प्रशिक्षण से उन्हें कुछ नया सीखने का अवसर मिला है। रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपने भविष्य को लेकर अधिक सकारात्मक महसूस कर रही हैं। बालिकाओं ने यह भी कहा कि प्राप्त कौशल आगे चलकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने एवं सम्मानजनक आजीविका अर्जित करने में सहायक सिद्ध होंगे।
यह सप्तदिवसीय हस्तशिल्प प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल बालिकाओं को आजीविका उन्मुख कौशल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में सहायक सिद्ध होगा, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल विश्वविद्यालय की सामाजिक संवेदनशीलता, समावेशी विकास एवं बालिका सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से रेखांकित करती है।
INPUT-ANANYA MISHRA













































