उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से एक बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल वाली खबर सामने आई है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट रहे अलंकार अग्निहोत्री, जिन्होंने गणतंत्र दिवस के दिन नाराजगी जाहिर करते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया था, उनके खिलाफ योगी आदित्यनाथ सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया है।
अलंकार अग्निहोत्री का क्या कहना है
अलंकार अग्निहोत्री ने बरेली जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें लगातार प्रताड़ित किया गया और मानसिक दबाव में रखा गया। निलंबन से पहले ही उन्होंने सरकारी आवास भी खाली कर दिया था।अपने बयान में अलंकार अग्निहोत्री ने प्रशासन की कार्यशैली पर तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कुछ कथित संतों को शंकराचार्य बताकर प्रशासन द्वारा VIP सुविधाएं दी जा रही हैं। बड़े-बड़े काफिलों में घूमना, अधिकारियों द्वारा उनके साथ फोटो खिंचवाना और यहां तक कि प्रयागराज के डीएम द्वारा उनके साथ बैठकर रोटियां सेंकना यह सब किस अधिकार के तहत हो रहा है, यह सवाल है।उन्होंने कहा कि एक तरफ असली शंकराचार्य के अनुयायियों पर लाठीचार्ज किया जा रहा है, उन्हें पीटा जा रहा है, और दूसरी तरफ सत्ता के करीबी कथित संतों की खुली चापलूसी हो रही है। यह प्रशासन के दोहरे मापदंड को दर्शाता है।
UGC के 13 जनवरी 2026 को जारी नियमों को लेकर भी अलंकार अग्निहोत्री ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह रेगुलेशन सामान्य वर्ग के मेधावी छात्रों के साथ भेदभाव करता है और उन्हें पहले से ही अपराधी मान लेने जैसी मानसिकता को बढ़ावा देता है। समता समितियों के नाम पर छात्रों के मानसिक और शारीरिक शोषण की आशंका है, जहां कोई भी झूठी शिकायत कर किसी का भविष्य बर्बाद कर सकता है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों पर भी हमला बोलते हुए पूछा कि ब्राह्मण समाज के नाम पर वोट लेकर सत्ता में पहुंचे सांसद और विधायक आज चुप क्यों हैं। क्या वे सिर्फ आदेश का इंतजार कर रहे हैं? क्या वे तब बोलेंगे, जब हालात पूरी तरह बिगड़ जाएंगे?
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि आज सवर्ण समाज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। सोशल मीडिया पर साफ दिख रहा है कि सामान्य वर्ग सरकार से अलग हो चुका है। उनके अनुसार आज न लोकतंत्र बचा है और न गणतंत्र—यह सिर्फ एक भ्रम तंत्र” बनकर रह गया है, जो “बांटो और राज करो” की नीति पर चल रहा है।उन्होंने भाजपा पर भी तीखा तंज कसते हुए कहा कि अब वह भारतीय जनता पार्टी नहीं, बल्कि “विदेशी जनता पार्टी” जैसी हो गई है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल, जिलाधिकारी और चुनाव आयोग को भेजा है ताकि यह संदेश जाए कि सामान्य वर्ग अब चुप नहीं है।
बहू-बेटियों का सड़कों पर रेप होगा
क्या आप लोग वेट कर रहे हैं कि हमारी बहू-बेटियों का सड़कों पर रेप हो। क्या आप अपने आकाओं के आदेश का इंतजार कर रहे हैं? क्या आप तब बोलेंगे, जब स्थिति हाथ से निकल जाएगी? आपने ब्राह्मण के नाम टिकट लिया। ब्राह्मणों को वोट लिया। जब आप जीत गए। तो कोई मतलब ही नहीं।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अलंकार अग्निहोत्री से फोन पर बातचीत की
निलंबन के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अलंकार अग्निहोत्री से फोन पर बातचीत की। शंकराचार्य ने कहा कि उनके साथ जो हुआ, वह गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही उनका प्रशासनिक पद चला गया हो, लेकिन धर्म क्षेत्र में उन्हें इससे भी बड़ा सम्मान और भूमिका मिलेगी।शंकराचार्य ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि अलंकार अग्निहोत्री ने वर्षों की मेहनत और पढ़ाई के बाद यह पद हासिल किया था, जो एक झटके में छिन गया। लेकिन जिस साहस और निष्ठा के साथ उन्होंने सनातन धर्म के पक्ष में आवाज उठाई है, उसके लिए पूरा सनातनी समाज उनका सम्मान करता है।
अब जानिए अलंकार अग्निहोत्री के बारे में
अलंकार अग्निहोत्री कानपुर के रहने वाले हैं। बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया था। मां बैंक में थीं। 1998 में यूपी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में अलंकार को 21वां स्थान मिला।इसके बाद काशी हिंदू विश्वविद्यालय से बीटेक किया और नौकरी करने लगे। 2014 में जब अलंकार के सभी छोटे भाई सेटल हो गए। बहन की शादी हो गई, तो उन्होंने नौकरी छोड़कर UPPCS की तैयारी की और 2019 में एग्जाम क्वालिफाई किया।













































