यूपी के मुसहर, वनटांगिया, बुक्सा और बावरिया समुदाय बने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत, योगी सरकार की योजनाओं का बड़ा असर

UP: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में लंबे समय तक बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहने वाले मुसहर, वनटांगिया, बावरिया और बुक्सा समुदाय के लोग अब ‘आत्मनिर्भर’ बनकर विकास की नई कहानी लिख रहे हैं। योगी सरकार की पहल से ये परिवार न केवल सरकारी योजनाओं से जुड़ रहे हैं, बल्कि समाज में सम्मान और नई पहचान भी पा रहे हैं।

सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे घर-घर तक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि राज्य का सबसे कमजोर व्यक्ति सशक्त होगा तो ही उत्तर प्रदेश ‘उत्तम प्रदेश’ बनेगा। इसी दृष्टि से सरकार ने स्टार्ट-अप फंड, रिवॉल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड के माध्यम से इन समुदायों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। इससे ये लोग साहूकारों के चंगुल से मुक्त होकर खुद का व्यवसाय कर रहे हैं।

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मुसहर समुदाय को नई पहचान

मुसहर समुदाय, जो लंबे समय तक समाज की मुख्यधारा से कटे हुए थे, अब 2843 ग्राम पंचायतों में संगठित हो चुके हैं। 1896 विशिष्ट मुसहर समूहों के माध्यम से इन परिवारों को सीधे स्वरोजगार और सरकारी अनुदान से जोड़ा गया है। इससे वर्षों से चले आ रहे गरीबी और पलायन के चक्र को तोड़ा जा रहा है।

वनटांगिया और बुक्सा समुदाय का आर्थिक सशक्तिकरण

वनटांगिया समुदाय के 496 समूहों को संगठित किया गया है, जिन्हें अब राजस्व ग्राम का अधिकार और आर्थिक अवसर मिले हैं। बुक्सा जनजाति के 548 सदस्यों को भी समूहों में जोड़कर उनके पारंपरिक कौशल को आधुनिक बाजार से जोड़ा गया है। इससे इन समुदायों की आजीविका में सुधार आया है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

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बावरिया परिवारों को योजनाओं का सुरक्षा कवच

घुमंतू बावरिया समुदाय के 2346 परिवारों को पहली बार स्थायी रूप से संगठित कर सरकार ने ‘सुरक्षा कवच’ प्रदान किया है। इन परिवारों को आवास, आयुष्मान कार्ड, राशन और पेंशन जैसी योजनाओं का सीधा लाभ दिया जा रहा है। उद्देश्य है कि ये समुदाय स्थायी रूप से बसें और समाज में अपनी गौरवशाली पहचान हासिल करें।

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