पूर्व सांसद और बीजेपी नेता बृजभूषण शरण सिंह (Brijbhushan Sharan Singh) ने यूजीसी (UGC) के नए नियमों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए सरकार से इन नियमों को वापस लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज को केवल ऑफिस में बैठकर नहीं चलाया जा सकता और बदलाव देखने के लिए गांवों का दौरा करना जरूरी है।
बच्चों के बीच भेदभाव रहित माहौल का उदाहरण
वीडियो में बृजभूषण शरण सिंह ने बच्चों की गतिविधियों का उदाहरण देते हुए बताया कि गांव में बच्चे रोज शाम को साथ खेलते हैं और नाश्ता भी साथ में करते हैं। उन्होंने कहा कि यह किसी कानून या नियम के तहत नहीं है, बल्कि हमारी सनातन परंपरा है कि किसी के साथ जाति या सामाजिक स्थिति के आधार पर भेदभाव न किया जाए।
सनातन परंपरा और समाज के मूल्यों पर जोर
उन्होंने पंडित दीनदयाल की बात को उद्धृत करते हुए कहा कि ‘जो नीचे हैं उन्हें ऊपर लाना हमारी परंपरा है।’ बृजभूषण शरण सिंह ने सरकार से अपील की कि नए नियम समाज में भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि नियमों के कारण भविष्य में स्कूलों में दलित या ओबीसी बच्चों को प्रवेश में बाधा हो सकती है। सरकार से हाथ जोड़कर विनती, है यूजीसी को वापस लिया जाए।
करण भूषण सिंह का भी समर्थन

यूजीसी के नए नियम पर बीजेपी के अंदर विरोधाभास देखने को मिल रहा है। बृजभूषण शरण सिंह के बड़े बेटे प्रतीक भूषण सिंह इस नियम का विरोध कर रहे हैं, जबकि छोटे बेटे और सांसद करण भूषण सिंह नियम का समर्थन कर रहे थे। हाल ही में करण भूषण सिंह ने स्पष्ट किया कि स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य के रूप में यह नियम उनके सुझाव पर नहीं बने हैं और वह समाज के साथ हैं।














































