अयोध्या: आचार्य सत्येंद्र दास जी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि कल, भव्य संत-समागम और भंडारा का भी आयोजन

UP: अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के पूर्व मुख्य पुजारी ब्रह्मलीन आचार्य सत्येंद्र दास जी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि कल यानी 1 फरवरी 2026 को बड़ी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाई जाएगी। आचार्य सत्येंद्र दास जी का पूरा जीवन प्रभु श्रीराम की सेवा, पूजन-अर्चन और राम मंदिर आंदोलन को समर्पित रहा। वे उस ऐतिहासिक कालखंड के साक्षी थे जब प्रभु श्रीरामलला टेंट में विराजमान थे। टेंट काल से लेकर भव्य राम मंदिर के निर्माण और 22 जनवरी 2024 को हुए प्राण-प्रतिष्ठा समारोह तक उन्होंने मुख्य पुजारी के रूप में निरंतर अपनी सेवाएं निभाईं।

मंदिर में वर्तमान व्यवस्था

आचार्य सत्येंद्र दास जी महाराज के ब्रह्मलीन होने के बाद राम जन्मभूमि मंदिर में पूजन-अर्चन, दैनिक आरती और अन्य अनुष्ठानों की जिम्मेदारी उनके शिष्य महंत प्रदीप दास जी महाराज सहित अन्य पुजारियों के कंधों पर है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने महाराज जी के प्रति गहन सम्मान स्वरूप मुख्य पुजारी का पद अभी तक रिक्त रखा है और किसी को इस पद पर नियुक्त नहीं किया गया है। ट्रस्ट का स्पष्ट रुख है कि यह स्थान महाराज जी की स्मृति में सम्मानपूर्वक खाली रहेगा।

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पुण्यतिथि के मुख्य आयोजन

कल 1 फरवरी को महाराज जी के निजी स्थल सत्य धाम गोपाल मंदिर, रामघाट, श्री अयोध्या धाम में विशाल संत-समागम, भजन-कीर्तन, प्रवचन और सामूहिक भंडारे का आयोजन किया जाएगा। संत-महंतों, राम भक्तों और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति की उम्मीद है। यह कार्यक्रम महाराज जी की स्मृति में उनकी राम-भक्ति और सेवा भाव को याद करने का माध्यम बनेगा।

बृजभूषण शरण सिंह ने दी श्रद्धांजलि

आज कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह अयोध्या पहुंचे और ब्रह्मलीन आचार्य सत्येंद्र दास जी महाराज को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, महाराज जी का संपूर्ण जीवन प्रभु श्रीरामलला की सेवा में समर्पित रहा। वे केवल एक पुजारी नहीं थे, बल्कि राम मंदिर आंदोलन के सच्चे योद्धा और रामलला के निष्ठावान सेवक थे। उनकी स्मृति हमेशा जीवित रहेगी।

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आचार्य सत्येंद्र दास जी का योगदान

आचार्य सत्येंद्र दास जी ने दशकों तक राम जन्मभूमि की सेवा की। वे राम मंदिर आंदोलन के दौरान भी सक्रिय रहे और प्रभु श्रीराम की पूजा-अर्चना में कोई कमी नहीं होने दी। उनकी मृत्यु के बाद भी उनकी शिक्षाएं और भक्ति भाव मंदिर के पुजारियों और भक्तों में जीवित हैं। प्रथम पुण्यतिथि पर अयोध्या में भावुक माहौल रहने की संभावना है, जहां हजारों राम भक्त महाराज जी को याद कर श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे।

Input- Ankur Pandey

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