उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राज्य कर विभाग (GST) के उपायुक्त (Deputy Commissioner) प्रशांत कुमार सिंह ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। उन्होंने 31 जनवरी 2026 को स्पष्ट किया कि यह फैसला बिना किसी दबाव के लिया गया है और वे अब अपने कार्यालय में वापस काम कर रहे हैं। सोमवार (2 फरवरी) से वे पूर्ण रूप से कार्यभार संभालेंगे।
यह घटना 27 जनवरी 2026 को शुरू हुई, जब प्रशांत सिंह ने प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से आहत होकर इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने भावुक होकर कहा था कि “मैं योगी जी का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता, वे हमारे अन्नदाता हैं। जिसका नमक खाते हैं, उसका आदर करना चाहिए।” इस्तीफे के बाद वे फूट-फूटकर रो पड़े थे और पत्नी को फोन कर यह बात बताई थी। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जहां कुछ ने इसे “योगी भक्ति” बताया तो कुछ ने ‘नौटंकी’ या ‘ड्रामा’ कहा।
इस्तीफा देने के बाद मामला उलझ गया क्योंकि उनका त्यागपत्र शासन या राज्य कर आयुक्त कार्यालय को तुरंत नहीं मिला था, जिससे “खेल” या रहस्य की बातें चलीं। लेकिन 31 जनवरी को उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया। प्रशांत सिंह ने दावा किया कि वे सरकार का नमक खाते हैं इसलिए अपमान सहन नहीं कर सकते, लेकिन अब वापसी पर जोर दिया कि कोई दबाव नहीं है।
विवाद का नया मोड़
इस्तीफे के बाद उनके सगे बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने गंभीर आरोप लगाए कि प्रशांत ने फर्जी दिव्यांग (विकलांगता) प्रमाणपत्र बनवाकर 2009 में सरकारी नौकरी हासिल की थी। विश्वजीत ने कहा कि विभागीय जांच चल रही है और नौकरी खतरे में है, इसलिए इस्तीफा जांच से बचने की ‘साजिश’ या ‘नौटंकी’ है। इसके जवाब में प्रशांत सिंह ने पलटवार किया और भाई विश्वजीत पर मुख्तार अंसारी गैंग से जुड़े होने, वसूली, धमकी देने और अंसारी के फाइनेंशियल एडवाइजर रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विश्वजीत के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
यह पूरा मामला शंकराचार्य विवाद के बीच इस्तीफों की राजनीति का हिस्सा बन गया है (पहले बरेली मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने योगी के खिलाफ इस्तीफा दिया था, जिसके बाद सस्पेंड हुए)। सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘ड्रामा’, ‘नौटंकी’ या “राजनीतिक स्टंट” बता रहे हैं, जबकि कुछ योगी समर्थक इसे “सच्ची भक्ति” मान रहे हैं। विभाग में जांच चल रही है और फर्जी सर्टिफिकेट के आरोपों पर विभागीय कार्रवाई की संभावना है।यह घटना उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक और राजनीतिक बहस को और गरमा रही है, जहां अधिकारी भी अब खुले तौर पर राजनीतिक बयान दे रहे हैं।
















































