समाजवादी पार्टी (सपा) की कैराना (उत्तर प्रदेश) से सांसद इकरा हसन (Iqra Hasan/Choudhary) ने बेटियों की शिक्षा और दहेज प्रथा पर एक प्रभावशाली बयान दिया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने कहा: “अपनी बेटियों को दहेज़ कम दें, लेकिन शिक्षा ज़रूर दें।” यह बयान जनवरी 2026 में मुजफ्फरनगर के खटौली इलाके में इस्लामिया गर्ल्स एकेडमी या कैराना-शामली क्षेत्र की एक जनसभा/शैक्षणिक कार्यक्रम के दौरान दिया गया।
इकरा हसन ने आगे स्पष्ट किया कि दहेज कुछ पलों की रस्म या दिखावा हो सकता है, लेकिन शिक्षा जीवन भर का सहारा बनती है। शिक्षा बेटियों को आत्मनिर्भर बनाती है, उन्हें सम्मान दिलाती है, आत्मविश्वास देती है और उनके भविष्य को उज्ज्वल बनाती है। उन्होंने अपील की कि माता-पिता बेटियों की पढ़ाई पर खर्च करने में कंजूसी न करें—उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर, वकील या सफल पेशेवर बनाएं, ताकि वे न केवल खुद पर निर्भर रहें बल्कि परिवार और समाज के लिए भी उपयोगी साबित हों। अशिक्षित बेटियां निर्भर रहती हैं, जबकि शिक्षित बेटियां परिवार को सशक्त बनाती हैं।
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यह बयान दहेज प्रथा के खिलाफ समाज में जागरूकता फैलाने वाला माना जा रहा है, खासकर ग्रामीण और मुस्लिम बहुल इलाकों में जहां दहेज की समस्या गंभीर है। सोशल मीडिया पर इकरा हसन के इस वीडियो और पोस्ट को लाखों लोग शेयर कर रहे हैं, जहां लोग इसे “समाज सुधार का संदेश” बता रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि “शिक्षा ही असली दहेज है” या “दहेज कम दो, पढ़ाई ज्यादा दो”। हालांकि कुछ कमेंट्स में विवाद भी दिख रहा है, लेकिन ज्यादातर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।
इकरा हसन कौन हैं?*
इकरा हसन (जन्म: 26 अगस्त 1994) कैराना लोकसभा सीट से 2024 के चुनाव में पहली बार सांसद चुनी गईं। वे समाजवादी पार्टी की युवा नेता हैं और राजनीतिक परिवार से आती हैं—उनके पिता चौधरी मुनव्वर हसन (पूर्व सांसद), मां बेगम तब्बसुम हसन (पूर्व सांसद) और दादा भी राजनीति में सक्रिय रहे। इकरा ने लंदन की प्रतिष्ठित SOAS यूनिवर्सिटी से MSc और Law की पढ़ाई की है। वे मुस्लिम गुज्जर समुदाय से हैं और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे मुद्दों पर अक्सर बोलती हैं।
INPUT-ANANYA MISHRA














































