दिल्ली उच्च न्यायालय में शुक्रवार (30 जनवरी 2026) को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने स्पष्ट किया कि पायलटों के लिए अनिवार्य साप्ताहिक आराम (weekly rest) पूरी तरह लागू है और किसी भी एयरलाइन को इसमें कोई छूट नहीं दी गई है। DGCA की ओर से अधिवक्ता अंजना गोसाईं ने अदालत को बताया कि साप्ताहिक आराम नॉन-नेगोशिएबल है, इसे बदला नहीं जा सकता। किसी एयरलाइन को इस संबंध में कोई राहत नहीं दी गई है। यह बयान एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें DGCA के संशोधित फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों में छूट देने के फैसले को चुनौती दी गई है।
घटना का बैकग्राउंड
DGCA ने 2025 में FDTL नियमों को संशोधित किया था, जिसमें पायलटों के साप्ताहिक आराम को 36 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे किया गया था और नाइट लैंडिंग्स को 6 से घटाकर 2 किया गया था। ये बदलाव पायलट थकान (fatigue) को कम करने और उड़ान सुरक्षा बढ़ाने के लिए थे। लेकिन दिसंबर 2025 में इंडिगो एयरलाइंस में बड़े पैमाने पर फ्लाइट कैंसिलेशन और ऑपरेशनल दिक्कतों के बाद DGCA ने इनमें से कुछ नियमों को अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया।
- इंडिगो को नाइट ऑपरेशंस पर सीमित और समयबद्ध छूट दी गई, जो 10 फरवरी 2026 तक वैध है।
- लेकिन साप्ताहिक आराम और लीव्स के नियम को “अनिश्चितकालीन” तरीके से वापस ले लिया गया, जिस पर
- हाईकोर्ट ने सवाल उठाया। अदालत ने पूछा कि जब इंडिगो को नाइट ड्यूटी पर अस्थायी राहत दी गई, तो साप्ताहिक आराम को बिना डेडलाइन के क्यों वापस लिया गया? यह यात्री सुरक्षा से जुड़ा सीधा मुद्दा है।
अदालत का फैसला और नोटिस
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने केंद्र सरकार, DGCA और इंडिगो के ऑपरेटर इंटरग्लोब एविएशन को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ताओं (साबरी रॉय लेंका समेत अन्य) ने दावा किया कि ये छूट पायलट थकान बढ़ाएगी और यात्री सुरक्षा को खतरा है। अदालत ने DGCA से जवाब मांगा कि ये फैसले का क्या तर्क है। DGCA ने स्पष्ट किया कि साप्ताहिक आराम CAR (सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स) के तहत पूरी तरह लागू है और लीव्स एयरलाइन-पायलट के बीच कॉन्ट्रैक्ट का मामला है। अगली सुनवाई कुछ हफ्तों बाद होगी।
मुख्य बिंदु
- साप्ताहिक आराम: पूरी तरह अनिवार्य, कोई छूट नहीं।
- इंडिगो को राहत: सिर्फ नाइट फ्लाइट्स पर, 10 फरवरी 2026 तक।
- हाईकोर्ट का सवाल: अनिश्चितकालीन छूट का क्या औचित्य?
- याचिका का आधार: FDTL नियमों की छूट से थकान बढ़ेगी, सुरक्षा प्रभावित होगी।
यह मामला एविएशन इंडस्ट्री में पायलट थकान और सुरक्षा को लेकर चल रही बहस का हिस्सा है। DGCA का बयान राहत देता है, लेकिन हाईकोर्ट की जांच से आगे क्या होता है, यह देखना होगा।

















































