वाराणसी: गंगा के जलस्तर में गिरावट के बाद एक बार फिर बढ़ोतरी शुरू हो गई है। केंद्रीय जल आयोग की राजघाट गेट साइट के मुताबिक, गुरुवार सुबह 10 बजे गंगा का जलस्तर 69.29 मीटर दर्ज किया गया। सुबह आठ बजे जलस्तर स्थिर होने के बाद अब करीब 0.5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी हो रही है। जलस्तर बढ़ने से काशी के तटवर्ती इलाकों में एक बार फिर चिंता बढ़ गई है।
गंगा का चेतावनी स्तर 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.262 मीटर है। मौजूदा जलस्तर चेतावनी बिंदु से करीब 97 सेंटीमीटर नीचे है। केंद्रीय जल आयोग ने अगले सात दिनों तक जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका जताई है। अनुमान के मुताबिक 12 सितंबर तक जलस्तर 71 मीटर के आसपास पहुंच सकता है। लगातार बढ़ोतरी की स्थिति में इसके खतरे के निशान के करीब पहुंचने की आशंका है। जलस्तर बढ़ने के कारण वाराणसी के सभी 84 घाट पूरी तरह डूब चुके हैं। गंगा के साथ वरुणा नदी में भी उफान है। इसके चलते नदी के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है।
वरुणा नदी के किनारे रहने वाले लोगों को फिलहाल राहत नहीं मिली है। पुराना पुल, नक्खीघाट और सलारपुर समेत कई इलाकों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। सैकड़ों मकान इसकी जद में हैं, जबकि दर्जनों परिवार घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं। कई परिवार मकानों की छतों पर रहने को मजबूर हैं।
जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों ने तटवर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। केंद्रीय जल आयोग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले सात दिनों तक गंगा और वरुणा के जलस्तर में बढ़ोतरी जारी रह सकती है। ऐसे में बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों को फिलहाल राहत मिलने के आसार कम हैं।
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