गोंडा। बच्चों को घर और स्कूल ले जाने वाले स्कूली वाहनों की निगरानी को सख्त और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार भले ही गंभीर हो, लेकिन स्कूल प्रबंधक अब भी मनमानी कर रहे हैं। परिवहन विभाग की सख्ती के बावजूद जिले में 313 स्कूली वाहनों का विवरण यूपी इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मैनेजमेंट पोर्टल (UP ISVMP) पर दर्ज नहीं कराया गया है। ये वाहन 242 स्कूलों में संचालित हो रहे हैं।
स्कूल प्रबंधकों की लापरवाही
परिवहन विभाग ने स्कूली वाहनों के लिए सख्त मानक निर्धारित किए हैं, लेकिन कई विद्यालय संचालक अभी भी खटारा गाड़ियों से ही बच्चों को स्कूल और घर पहुंचा रहे हैं। इससे अक्सर हादसे हो रहे हैं। दुर्घटना होने के बाद ही एआरटीओ मौके पर पहुंचकर फिटनेस जांच करते हैं, तब खामियां सामने आती हैं।
पोर्टल की उपयोगिता
यूपी इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मैनेजमेंट पोर्टल पर वाहन का नंबर डालते ही उसके रजिस्ट्रेशन, फिटनेस, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र और इंश्योरेंस की पूरी स्थिति तुरंत सामने आ जाती है। यदि कोई वाहन अनफिट पाया जाता है तो पोर्टल उसे रेड मार्क कर देगा, जिससे एआरटीओ उस बस को सड़क से तुरंत हटवा सकेंगे।
कार्रवाई की चेतावनी
एआरटीओ आरसी भारतीय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो स्कूल प्रबंधक अपने वाहनों की जानकारी पोर्टल पर दर्ज नहीं करेंगे या गलत तथ्य पेश करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान किसी भी बस में तकनीकी खामी या कागजों में हेराफेरी मिलने पर संबंधित स्कूल प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
संदर्भ:
यह जानकारी गोंडा परिवहन विभाग द्वारा दी गई है। विभाग अब सभी स्कूल प्रबंधकों को पोर्टल पर वाहनों का विवरण अपलोड करने के लिए अंतिम नोटिस जारी करने की तैयारी कर रहा है।
संदेश:
स्कूली बच्चों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। स्कूल प्रबंधकों को चाहिए कि वे खटारा वाहनों का इस्तेमाल बंद करें और सभी स्कूली वाहनों का पूरा विवरण तुरंत UP ISVMP पोर्टल पर दर्ज कराएं। अभिभावक भी अपने बच्चों के स्कूल वैन की फिटनेस और पोर्टल पर दर्ज स्थिति नियमित रूप से जांचें।










































