महिला आरक्षण विधेयक (Women’s Reservation Bill) को लेकर विरोध के बीच बीजेपी नेता अपर्णा यादव (Aparna Yadav) द्वारा समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) और कांग्रेस (Congress) के झंडे जलाने की घटना ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस मुद्दे पर अब सियासी बयानबाजी तेज हो गई है और विभिन्न दल एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं।
अखिलेश यादव का बयान
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा, लेकिन रंग जो होता है वह किसी न किसी धर्म से जुड़ा होता है। हर धर्म का कोई न कोई रंग होता है। अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादियों का लाल रंग है।लाल रंग क्रांति का तो है ही लेकिन यह हमारी देवियों का रंग भी है। उनके पहनावे का भी रंग है। हनुमान जी का रंग भी लाल है। नए शादीशुदा जोड़े जब बनते हैं उनके चूड़े का रंग भी लाल होता है। इसलिए किसी की भी भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहिए।
आधी आबादी के अधिकारों पर जोर
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं को उनका अधिकार और सम्मान दिलाने के पक्ष में है। उन्होंने सवाल उठाया कि ‘आधी आबादी’ की परिभाषा कौन तय करेगा और इसमें किन-किन वर्गों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज समेत सभी वर्गों को समान अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए।
अपर्णा यादव का विरोध और आरोप
वहीं, अपर्णा यादव ने अपने विरोध प्रदर्शन को सही ठहराते हुए विपक्षी दलों पर महिलाओं के सम्मान की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया संदेश में इस घटना को ‘अंधेरी रात’ बताते हुए कहा कि उन्होंने यह कदम महिलाओं की अस्मिता के समर्थन में उठाया है। उनके अनुसार, विपक्ष का रवैया महिला विरोधी है और देश की महिलाएं इसे कभी माफ नहीं करेंगी।
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