गोरखपुर : दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने अपना 76वां स्थापना दिवस अत्यंत धूमधाम एवं गरिमामयी वातावरण में मनाया। स्वतंत्रता के पश्चात उत्तर प्रदेश के प्रथम राज्य विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित इस विश्वविद्यालय की आधारशिला 1 मई 1950 को तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत द्वारा रखी गई थी।
पंत प्रतिमा पर पुष्पांजलि से हुआ शुभारंभ
स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ प्रातः 9 बजे विश्वविद्यालय परिसर स्थित पंत पार्क में पंडित गोविंद बल्लभ पंत की प्रतिमा पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन द्वारा पुष्पांजलि एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे और उन्होंने भी श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
पंत भवन पर पूजा-अर्चना
इसके उपरांत पंत भवन में स्थापित शिलान्यास पट्टिका के समक्ष कुलपति प्रो. पूनम टंडन द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न की गई, जिसमें विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने सहभागिता की। उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय की स्थापना के समय कुलपति कार्यालय का संचालन पंत भवन से ही किया जाता था।
गरबा की मनोहारी प्रस्तुति के साथ मना गुजरात स्थापना दिवस; पुरातन छात्रों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम का मुख्य आयोजन महायोगी गुरु श्री गोरखनाथ शोधपीठ में कुलपति प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस अवसर पर गुजरात स्थापना दिवस का भी उल्लासपूर्वक आयोजन किया गया, जिसमें छात्राओं ने पारंपरिक गरबा नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
स्थापना दिवस पर कुलपति ने साझा की विकास और विस्तार की रूपरेखा
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा, शैक्षणिक उपलब्धियों एवं नवाचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्वविद्यालय निरंतर गुणवत्ता, अनुसंधान एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा में अग्रसर है।
कुलपति ने सभी को विश्वविद्यालय के 76वें स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। ऐसे समय जब पूर्वांचल में उच्च शिक्षा के विस्तार की आवश्यकता थी उस समय स्वतंत्रता के पश्चात राज्य के पहले विश्वविद्यालय की स्थापना में जिन महानुभावों का योगदान रहा, उन सभी को कोटि-कोटि नमन।
कुलपति ने कहा कि गोरखपुर विश्वविद्यालय आज देश के अग्रणी विश्वविद्यालयों में शामिल हो चुका है। राष्ट्रीय मूल्यांकन में ‘A++’ ग्रेड प्राप्त करने के साथ-साथ यूजीसी द्वारा नवाचारी विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता और विभिन्न प्रतिष्ठित रैंकिंग में सम्मानजनक स्थान प्राप्त करना इसकी उपलब्धियों को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के पुरातन छात्र शिक्षा, विज्ञान, उद्योग, राजनीति सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। उनकी उपलब्धियाँ विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
कुलपति ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय ने 30 से अधिक अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं और जॉइंट पीएचडी तथा ड्यूल डिग्री कार्यक्रमों के संचालन की दिशा में कार्य कर रहा है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के संदर्भ में उन्होंने बताया कि पीएम-उषा योजना के अंतर्गत लगभग 100 करोड़ रुपये की परियोजनाएँ संचालित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त, माननीय मुख्यमंत्री जी के सहयोग से राज्य सरकार द्वारा भी लगभग 100 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं में सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे विश्वविद्यालय को आधुनिक स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
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कुलपति ने कहा कि स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों से प्राप्त आय 9 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 50 करोड़ रुपये तक पहुँच गई है, जो विश्वविद्यालय की वित्तीय सुदृढ़ता का प्रमाण है।
अंत में उन्होंने विश्वविद्यालय की सामाजिक प्रतिबद्धताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों में विभिन्न जन-जागरूकता अभियान, सर्वाइकल कैंसर वैक्सीनेशन को बढ़ावा, तथा टीबी रोगियों के लिए ‘पोषण पोटली’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से विश्वविद्यालय समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है।
मुख्य अतिथि अतुल सराफ का प्रेरक उद्बोधन
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित विश्वविद्यालय के गौरवशाली पुरातन छात्र एवं प्रसिद्ध उद्योगपति श्री अतुल सराफ ने अपने उद्बोधन में कहा कि जिस संस्थान की नींव संत-पुरुषों—महंत दिग्विजयनाथ एवं हनुमान दास पोद्दार—जैसे महान व्यक्तित्वों द्वारा रखी गई हो, उसका भविष्य निश्चित रूप से उज्ज्वल होता है।
उन्होंने विश्वविद्यालय के योगदान को स्मरण करते हुए विद्यार्थियों को उत्कृष्टता, अनुशासन और निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होने का प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने सभी को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का आह्वान किया।
विशिष्ट पुरातन छात्रों को किया गया सम्मानित
मुख्य समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के 19 विशिष्ट पुरातन छात्रों को सम्मानित किया गया।
डॉ अमित उपाध्याय, अध्यक्ष, पुरातन छात्र परिषद ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
मेधावी विद्यार्थी को भी सम्मान
इस अवसर पर मेधावी विद्यार्थी को भी सम्मानित किया गया। अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो अनुभूति दुबे ने विश्वविद्यालय द्वारा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए स्कॉलरशिप के बारे में जानकारी दी
कार्यक्रम का संचालन डॉ गरिमा सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन स्थापना दिवस समारोह की समन्वयक प्रो नंदिता सिंह ने किया।
विशिष्ट पूर्व छात्र सम्मान
आयोजित समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विशिष्ट पूर्व छात्रों एवं विद्वानों को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर प्रो. आराधना शुक्ला, प्रो. अमित पाठक, प्रो. एन. के. दुबे, श्री अनुपम मिश्रा, श्री नंद कुमार, डॉ. सिराज अख्तर वाज़ी, श्री राजेश कुमार उपाध्याय, श्री प्रशांत मिश्रा तथा वैभव मणि त्रिपाठी सहित अनेक प्रतिभाओं को उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए सराहा गया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पूर्व छात्र श्री संतोष कुमार अग्रवाल (निदेशक, Gallantt Ispat Limited), प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. ए. एन. राय, डॉ. प्रवीण कुमार शर्मा (ICHR) एवं श्री अमित कुमार सिंह (सहायक आयुक्त, राज्य कर) को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
छात्र उपलब्धियों का सम्मान
विभिन्न संकायों के छात्र-छात्राओं को उनकी इस वर्ष की उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर सुश्री शिवानी शाही (वाणिज्य) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्माण में योगदान, पूजा तिवारी (भूगोल) को डिप्टी कलेक्टर चयन तथा पुष्पराज मिश्रा (प्राचीन इतिहास) को यूपीपीसीएस में सफलता हेतु सम्मानित किया गया।
एनएसएस के अंतर्गत अमन कुमार एवं अंकिता त्रिपाठी को अंतरराष्ट्रीय युवा प्रतिनिधिमंडल में सहभागिता के लिए, वहीं ‘तरंग’ के अंतर्गत अंजलि मिश्रा, रोहित प्रजापति एवं अभिषेक श्रीवास्तव को उनकी रचनात्मक उपलब्धियों के लिए सराहा गया। साथ ही, हरिहर प्रसाद दुबे ट्रस्ट इनोवेशन अवार्ड के अंतर्गत अमन मौर्य एवं आदित्य कुमार को भी सम्मानित किया गया।
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