बांदा। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (ट्रेड डील) को लेकर किसानों की चिंता अब सड़क पर दिखाई देने लगी है। सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने जिला अध्यक्ष अवधेश सिंह पटेल के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपकर सरकार को आगाह किया कि यदि कृषि और डेयरी क्षेत्र को बिना पर्याप्त सुरक्षा विदेशी कंपनियों के लिए खोला गया तो इसका खामियाजा देश के करोड़ों किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भुगतना पड़ेगा।
प्रदर्शन में शामिल किसानों ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों के नाम पर यदि सस्ते विदेशी कृषि उत्पादों का आयात बढ़ा तो सबसे पहले छोटे और सीमांत किसान संकट में आ जाएंगे। इससे न केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था और सरकारी खरीद प्रभावित होगी, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। किसानों ने सरकार से किसान हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की।
भाकियू ने ज्ञापन के माध्यम से स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप सी-2+50 प्रतिशत फार्मूले पर एमएसपी की कानूनी गारंटी, सरकारी खरीद पर कानून, खेती के लिए मुफ्त बिजली और सभी ग्रामीण उपभोक्ताओं को 300 यूनिट निशुल्क बिजली उपलब्ध कराने की मांग उठाई।
किसानों ने डीएपी, यूरिया सहित सभी उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने, सूखा, बाढ़ और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर किसानों, बटाईदारों और कृषि मजदूरों को उचित मुआवजा देने की भी मांग की। साथ ही बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बढ़ते एकाधिकार पर रोक लगाने और किसानों के पारंपरिक बीज अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी रखी।भाकियू नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने किसान हितों की अनदेखी करते हुए व्यापार समझौतों पर आगे बढ़ने का प्रयास किया तो संगठन प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ने को मजबूर होगा।
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