UP: मधवापुर वन रेंज में बढ़ी बाघों की हलचल, बाघिन ने किया सियार का शिकार; चार बाघों की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत

सीतापुर: मधवापुर वन रेंज में बाघों की मौजूदगी लगातार बढ़ती नजर आ रही है. वन विभाग को अलग-अलग स्थानों पर मिले पगचिह्नों के आधार पर क्षेत्र में दो बाघ, एक बाघिन और एक शावक के होने की संभावना है. हालांकि अब तक ट्रैप कैमरे में केवल बाघिन की ही तस्वीर कैद हुई है.

शनिवार शाम बिजुआमऊ-नेवादा मार्ग के बीच बाघिन ने एक सियार का शिकार किया. रविवार को वन विभाग ने गंधरिया से पिंजरा हटाकर बिजुआमऊ के पास स्थापित कर दिया, जहां चारे के रूप में एक पड़वा बांधा गया है.

गौरतलब है कि 15 जुलाई को इसी बाघिन के हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी. इसके बाद से वन विभाग लगातार बाघिन को पकड़ने के प्रयास में जुटा है. गंधरिया, रसुलवा, पट्टी और बिजुआमऊ क्षेत्र में पिंजरे लगाए गए हैं तथा मचानों से निगरानी की जा रही है.

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दुधवा और कतरनियाघाट से आई विशेषज्ञ टीम भी बाघिन को ट्रैंकुलाइज करने के अभियान में शामिल है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल सकी है. वन क्षेत्राधिकारी सिकंदर सिंह के अनुसार, अलग-अलग स्थानों पर मिले भिन्न-भिन्न पगचिह्नों के आधार पर क्षेत्र में चार बाघों की मौजूदगी का अनुमान है. उन्होंने बताया कि ट्रैप कैमरे में अब तक केवल बाघिन दिखाई दी है.

करीब 10 किलोमीटर के दायरे में बाघों की गतिविधियों से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है. किसान और स्कूली बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं. बिजुआमऊ निवासी भानु प्रताप सिंह का आरोप है कि शाम होते ही वनकर्मी क्षेत्र से चले जाते हैं और फोन कॉल का भी जवाब नहीं देते, जिससे लोगों में असुरक्षा की भावना बनी हुई है.

लगभग 65 एकड़ में फैला मधवापुर वन रेंज बाघों के लिए अनुकूल आवास माना जा रहा है. जंगल के समीप सरायन नदी और दूसरी ओर बेतवा नाला होने के कारण यहां पानी और शिकार दोनों की पर्याप्त उपलब्धता है.उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में भी मधवापुर क्षेत्र के पास एक बाघ का शव मिला था.

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