‘झाड़ियां, बंद शौचालय और खाली पोषण व्यवस्था…’, इटावा में आंगनबाड़ी केंद्र का हाल बेहाल, बच्चों की पढ़ाई-पोषण प्रभावित

इटावा: महेवा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत उझियानी के मजरा नगला चंदी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण करने पर विभागीय दावों और जमीनी स्थिति में बड़ा अंतर देखने को मिला। सोमवार सुबह तय समय पर केंद्र संचालित नहीं मिला। सुबह 8:48 बजे सहायिका सरला देवी ने केंद्र का ताला खोला, जबकि आंगनबाड़ी कार्यकत्री संजीदा बेगम सुबह 9:30 बजे तक केंद्र नहीं पहुंचीं। लगभग 30 पंजीकृत बच्चों वाले केंद्र पर उस समय केवल छह बच्चे मौजूद थे, जिनकी देखभाल सहायिका अकेले करती नजर आईं।

परिसर में झाड़ियां, पेयजल और शौचालय की स्थिति भी खराब

निरीक्षण के दौरान केंद्र की मूलभूत सुविधाएं भी बेहद खराब मिलीं। परिसर में करीब दो फीट ऊंची झाड़ियां उगी थीं, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हैंडपंप खराब मिला और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था भी नहीं थी। हाथ धोने का स्थान घास-फूस से घिरा हुआ था। एक शौचालय बंद मिला, जबकि दूसरा भी उपयोग की स्थिति में नहीं था। बच्चों के कक्ष में पंखों का अभाव होने से उमस भरे मौसम में उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ रही थी।

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मेन्यू तय, लेकिन पोषाहार नहीं पहुंचा

सोमवार के निर्धारित भोजन मेन्यू में वेज पुलाव, सोयाबीन बड़ी, हरी सब्जी और चावल शामिल थे, लेकिन बच्चों को पोषाहार नहीं मिल रहा था। सहायिका ने बताया कि काफी समय से पोषाहार की आपूर्ति प्रभावित है। उनका कहना था कि कार्यकत्री गांव में नहीं रहतीं और विभागीय बैठक में शामिल होने के कारण समय पर केंद्र नहीं पहुंच सकीं।

बजट और तकनीकी समस्या का हवाला

आंगनबाड़ी कार्यकत्री संजीदा बेगम ने फोन पर बताया कि पोषाहार वितरण बजट जारी न होने से प्रभावित हुआ है। वहीं संबंधित अधिकारी ने कहा कि ग्राम प्रधान के खाते में बजट पहुंच चुका है, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्र के खाते में तकनीकी दिक्कत के कारण भुगतान नहीं हो सका। उन्होंने समस्या के जल्द समाधान का भरोसा दिया, हालांकि केंद्र के विलंब से खुलने और कार्यकत्री की अनुपस्थिति पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

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स्थानीय लोगों ने जताई चिंता

ग्रामीणों का कहना है कि यदि आंगनबाड़ी केंद्र की व्यवस्थाओं में जल्द सुधार नहीं किया गया तो बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। लोगों ने संबंधित विभाग से नियमित निगरानी और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

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