UP: बांदा जिले में संगठित अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच 12 वर्ष पुराने गैंगस्टर एक्ट के एक मामले में विशेष अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास और छह-छह हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय के इस निर्णय को अपराधियों के खिलाफ सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
गैंग बनाकर अपराध करने का था आरोप
विशेष लोक अभियोजक (गैंगस्टर एक्ट) सौरभ सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में थाना कोतवाली नगर में दर्ज मुकदमे में राहुल सोनी, धर्मपाल सिंह उर्फ रामभरोसे और अश्वनी सोनी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। आरोप था कि तीनों ने संगठित गिरोह बनाकर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया, जिससे क्षेत्र में भय का माहौल बना और अवैध तरीके से आर्थिक लाभ अर्जित किया गया।
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दस्तावेजी साक्ष्यों ने मजबूत किया अभियोजन पक्ष
मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास, गैंग चार्ट, संबंधित एफआईआर, सामान्य डायरी समेत अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए। अभियोजन पक्ष ने छह गवाहों के बयान भी दर्ज कराए, जिनकी गवाही और उपलब्ध साक्ष्यों को अदालत ने महत्वपूर्ण माना।
प्रभावी पैरवी के बाद सुनाया गया फैसला
अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक के साथ पैरोकार अभिलाष यादव तथा कोर्ट मोहर्रिर रघुनाथ और अमित ने प्रभावी ढंग से पैरवी की। दोनों पक्षों की दलीलें और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) श्रीपाल सिंह ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
जुर्माना न भरने पर बढ़ेगी सजा
अदालत ने प्रत्येक दोषी पर छह हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अर्थदंड जमा नहीं किया जाता है, तो संबंधित अभियुक्त को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। इस फैसले को जिले में संगठित अपराध पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

















































