गोरखपुर: अंबेडकरवादी छात्र सभा के बैनर तले दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में चल रहे विवादों और दलित, एससी, एसटी व ओबीसी वर्ग से जुड़े मुद्दों को लेकर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर दलित महापंचायत आयोजित की गई। महापंचायत में बड़ी संख्या में छात्र और कर्मचारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से संबंधित मामलों में प्रभावी कार्रवाई की मांग उठाई।
दलित कर्मचारी से मारपीट के मामले में कार्रवाई की मांग
महापंचायत के दौरान 22 दिसंबर को एक दलित कर्मचारी के साथ कथित मारपीट और जानमाल की धमकी के मामले का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने मामले में आरोपी बताए जा रहे डीडीयू के प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। साथ ही विश्वविद्यालय में जातीय तनाव पैदा कर पढ़ाई का माहौल प्रभावित करने की कथित कोशिशों पर भी कार्रवाई की मांग रखी गई।
विधि विभाग में अंबेडकर प्रतिमा लगाने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने विधि विभाग में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने की मांग भी दोहराई। उनका कहना है कि कर्मचारी और छात्र पिछले करीब 10 वर्षों से यह मांग उठाते आ रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। महापंचायत में विश्वविद्यालय प्रशासन से लंबित मांग को जल्द पूरा करने की अपील की गई।
छात्र नेता ने उठाए विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल
विश्वविद्यालय की छात्र नेता अनूप प्रसाद ने कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने दलित छात्रों और कर्मचारियों के कथित उत्पीड़न पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसा वातावरण बनाया जाना चाहिए, जहां छात्र बिना किसी भेदभाव के अपनी पढ़ाई कर सकें। उन्होंने प्रशासन से विवादों का समाधान कर शैक्षणिक माहौल बहाल करने की अपील की।
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प्रतिमा स्थापना की मांग को मिला समर्थन
अंबेडकर स्टूडेंट यूनियन और राइट के राष्ट्रीय संयोजक धीरेंद्र प्रताप ने भी डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक से उठ रही इस मांग पर विश्वविद्यालय प्रशासन को गंभीरता से विचार करते हुए जल्द निर्णय लेना चाहिए। महापंचायत में प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय में समानता, सुरक्षा और बेहतर शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करने की मांग की।
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